मुश्किल वक्त है ,
थोड़ा ठहरकर
गुजर जाएगा !
बिखरी हुई जिंदगी
फिर से सिमट जाएगा !
सुख-दुख तो हमारे
सच्चे साथी है ,
एक के बाद दुसरा
जरुर आएगा !
हो गर हमें खुद
पर भरोसा ,
फुलों की तरह
मुरझाकर खिल जाएगा !
कभी धुप कभी छांव तो
जिंदगी का कट्टु सत्य है !
धैर्य से जि कर देखो
हर बुरा दिन भी निकल
जाएगा !
किस्मत को बहाना बना
कर कब तलक रोएंगे !
आंखों से बहते नीर को
कब-तक पोंछेंगे !
रेत की तरह ये जिंदगी
हाथों से फिसल जाएगा !
जो कर्म पर भरोसा करते है
अपने कठिन परिश्रम से
चांद की तरह एक दिन
चमक जाएगा !
स्वरचित मौलिक रचना ✍️
अफ्फान हाजिपुरी
सर्वाधिकार सुरक्षित

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