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वो भी क्या थे दिन बचपन के
ज़ब हर पल खुशियों में बिता करती थीं
जाने कहाँ खोगए वो ज़माना हमारे
ज़ब कोई भी गम हमें न रहा करती थीं

वो माँ का आँचल थामे चलना घर में
वो पापा की ऊँगली पकड़ कर गलियों में घूमना
बहुत याद आते है वो खेल बचपन के हमारे
जहाँ कोई भी गम हमें न रहा करती थीं

अभी भी भूली नहीं हूँ वो स्कूल का पहला दिन
जो ज़िन्दगी के तरफ एक कदम बढ़ाई थी
नये नये दोस्तों से मिलना वो भी क्या दिन थे
जहाँ हर कोई अनजान होकर भी सब अपने से थे

वो दोस्तों के साथ मस्ती करना व उन्हें तंग करना
वो दीदीयो को अपने नटखट पन से हँसना और हँसाना
खोगए जाने कहाँ वो दिन सुहाने हमारे
ज़ब कोई भी तन्हाई हमारे जीवन में न रहा करती थीं

जाने क्यूँ जुदा हुए वो बचपन हमारी ज़िन्दगी से
यही एक शिकवा रहता है अपने ज़िन्दगी से
काश वो फिरसे दिन लौट आता नैना ज़ब हर पल ख़ुशी थीं
ज़ब ज़िन्दगी से अपनी न कभी कोई शिकयत रहा करती थीं...!!
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नैना.... ✍️✍️✍️💓