अलौकिक आभा लिए हैं कार्तिकेय की माता
शुभ्र वर्ण कमल है आसन पद्मासना स्कंदमाता
त्रिनेत्र हैं जिनके,करती सिंह की सवारी माता
ध्यान लगा विशुद्ध चक्र में भक्ति करे तेरी माता
नवचेतन जाग्रत कर,अज्ञानियों को देती ज्ञान माता
जगत जन्मदात्री करे हम श्रद्धा सुमन अर्पित माता
शिवप्रिया,करुणा,वात्सल्य से परिपूर्ण तुम हो माता
इच्छित फलदात्री कराती भवसागर पार तुम ही माता
सारी सृष्टि की कर्म विधाता,संताप हरती तुम ही माता
घिरी है काली बदरी,नेह की बारिश कर दो अब माता
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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