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कभी कभी दिल करता है
उड़ आउ परदेशी तेरे देश में
देख आउ ऐसा क्या है वहाँ
जो आते नहीं कभी लौट के.....!!

क्या हर कोई तेरा वहाँ अपना है
या कर लिया है गैरों से मेल कोई
कही तुम्हे लुभा तो नहीं लिया फूलो ने
जो उस देश के हर शहर में खिलतीं है.....!!

पहले तो नहीं थे तुम ऐसा
पर अब क्यूँ ऐसे बदल गए
कभी रहते थे तुम मेरी परछाई बनके
दूर हुए ऐसे की हरजाई बनगए....!!

क्या हाल कर दी है जुदाई तेरी
ज़ालिम सनम एक बार तो आकर देख ले
जाना हो गर तो चले जाना लेकिन
मेरी इंतज़ार का कोई सिला तो देदो.....!!

भूल गयीं आँखे कोई सपने सजाना
रूठ गयीं नींदे आँखों से मेरी
जो कभी रातो में सो न पायी
जितने भी ख्वाब देखी थीं पलकों ने
मिट गयीं खाक़ में ज़ालिम तेरे इंतज़ार में.....!!

छीन लिया किसने सुहाना महफिल मेरी
जो बदले में मुझे ये तन्हाई मिला
मेरी हँसती होठों की मुस्कान लेलिया
ताउम्र केलिए मुझे ख़ामोशी मिला.....!!

जाने किस गुनाह के लिए
किस्मत ने हमे ऐसी सज़ा दी है
जिससे मोहब्बत की नैना बेपनाह ज़िन्दगी में
वो हरजाई ने कोई और शहर चुन ली है.....!!
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नैना... ✍️✍️💓