है भविष्य विशाल, फिर क्यों इतने सवाल, 
चल रहा संभल के फिर भी है ठोकरों का जाल, 
गिर भी जाऊँ तो ये मन न मचाए बवाल, 
सहारे के सहारे उठा भी तो ये है नियति की चाल, 
फिर भी खुशी से फैल रहा  दर्द ये फिलहाल, 
करू मेहनत आखिर पसिने  का रंग भी है लाल, 
ना हार मान उठ ,मन मे ला भुचाल, 
कुछ न कर सका मत ले इसका मलाल, 
तु सोच मत कि क्या होगा तेरा हाल,
बिखर कर जो निखरता है वही तो होता है बेमिसालl