सत्य अहिंसा के थे पुजारी।
जिनके उपदेशों पर चलती
है आज भी ये दुनिया सारी।
राहें कितनी भी मुश्किल हों,
तनिक न हमें घबराना है,
दो कदमों के पीछे चलकर,
हजारों कदम मिलाना है।
जय जवान जय किसान का,
ये नारा अब न काफी है।
उठ कर संघर्ष करो जीवन में,
ये बतलाता चरखा टोपी है।
भारत के महानायक थे दोनों,
आदर्शवाद और थे सत्यवादी।
जिनके संघर्षों से हमको,
अंग्रेजों से मिली है आजादी।
अवतरण दिवस पर आज उन्हें मैं,
करती हूँ सत बार नमन।
हे भारत माँ के अमर सपूतों,
खिलते रहना ज्यों खिले सुमन।
शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश "उरई"

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