हाँ, मैं तेरे विचार लिखती हूँ, मैं अपने विचार लिखती हूँ ।
सबकी दुआएं हो जिसमें वही खयालात लिखती हूँ
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वफाओं का मसला ही लिखते हैं लोग अक्सर
मैं दर्द भरा दिल ,मरे हुए जज्बात, भावनाएं लिखती हूँ
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सही पहचाना तुमने ,मैं मुहब्बत नहीं करती
किसी को सताकर,अश्क ए दामन नहीं लिखती हूँ
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जिगर चाहिये थोड़ा, मुखालफत करने को
सत्य को सत्य, हाँ झुठ को मैं झूठ लिखती हूँ
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कृष्णा की ✍️कलम से

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