कुछ भूली बिसरी यादें हैं,जो दिल से लगा कर रखी है ,
जब भी मेरा मन करता है, मैं याद उन्हें कर लेता हूं ,
इस दुनिया की भीड़ में मैं,चुपके से उन्हें पढ़ लेता हूं ,
मन ही मन में उनको पढ़कर,मैं थोड़ा सा हंस लेता हूं ,
बचपन की वो नादानी है,या चढ़ती हुई जवानी है,
वह भूली बिसरी यादें हैं, जो दिल से लगा कर रखी है,
उन भूली बिसरी यादों से,फिर बच्चा बन हंस लेता हूं ,
उन भूली बिसरी यादों को,फिर जीने का मन करताहै,
बच्चा बनकर उन यादों को,फिर जीने का मनकरताहै ,
उन बचपन की नादानी को,फिर करने का मन करता है
कुछ पीछे छूटे किस्सों को,पूरा करने का मन करता है, जिंदगी के कुछ हिस्सों को,फिर जीने का मन करता है, उन भूली बिसरी यादों को,फिर जीने का मन करता है, उन भूली बिसरी यादों को,फिर जीने का मन करता है!
संगीता वर्मा

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