किराडू का मंदिर
राजस्थान ऐसा राज्य जहां के कण कण में शूरवीरों की वीरता,संघर्ष,और रहस्य दफन हैं।
भानगढ़,और कुलधरा की तरह ही ऐसा ही एक स्थान है  किराडू का मंदिर,जिसका स्थापत्य,और शिल्प और कारीगरी अप्रतिम है।

किराडू का मंदिर
इसे दूसरा या लघु खजुराहो भी कहते हैं ।दक्षिण भारतीय स्थापत्य का यह  मंदिर बेजोड़ नमूना है।
राजस्थान के बाड़मेर से 43 किलोमीटर की दूरी पर यह  मंदिर हाथमा गांव में स्थित है।
 यह मंदिर  पांच मंदिरों की श्रृंखला  है।
प्रणय करते नायक ,नायिका,आईना निहारती नायिका,शिशु क्रीड़ा, थाल सजाए नायिका,नवदुर्गा,इंद्र,वरुण,शिव आदि सभी देवता की मूर्तियां का  स्थापत्य  बेजोड़ है।

लेकिन ऐसा क्या है , कि इस मंदिर को खजुराहो को भांति प्रसिद्धि नहीं मिल पाई।
स्थानीय लोगों का मानना है और किवदंती है कि पुराने समय में एक सिद्ध योगी यहां अपने शिष्यों के साथ  यहां आए थे  ,ग्रामीण उनकी खूब सेवा सुश्रुषा किया करते ।
कुछ दिन बाद योगी अपने शिष्यों को छोड़ देशाटन चले गए,और गांव वालों को उनका ख्याल रखने को कहा।
लेकिन गांव वालों ने उनकी कोई मदद नहीं की।
जब योगी लौट कर आए तो अपने शिष्यों की दुर्दशा देख क्रोधित हो उठे और शाप दिया कि तुम लोगों का हृदय पाषाण का था, तुम लोग साधु का भरण पोषण नहीं कर पाए,इसलिए पूरा गांव पाषाण का बन जाए।
एक कुम्हारन जिसने शिष्यों की सेवा की थी ,उसे उन्होंने कहा कि तुम शाम होने से पहले गांव छोड़ कर चली जाओ । कुम्हारन अपना सामान बांध गांव से जाने लगी ,लेकिन मानव स्वभाव की कमजोरी होती है ,उत्सुकता ।उत्सुकता वस उसने पीछे मुड़ कर देखा ,और वो भी पत्थर की बन गई।
किराडू का मंदिर दिन में तो पर्यटकों और कला प्रेमियों से भरा रहता है ,लेकिन शाम के बाद कोई नहीं रुकता।
उस कुम्हारन की मूर्ति आज भी उस गांव में विद्यमान है,इस बात का प्रमाण कुछ तो हुआ था ,इस गांव में इस मंदिर परिसर में।