साया बनकर जिसके साथ चलने को
सात फेरे लेकर जिसका साथ देने को
बनी थी मैं दुल्हन सजन के साथ जाने को
निभाया हर लम्हा, सुखद संसार पाने को
हाँ सजना तुम्ही हो ,जिसे पाने छोड़ आयी
माँ के आँगन, पिता के प्यार, भाई की कलाई
जिसने पलकों पर बिठाया था ,लोरी गाकर
जगकर मुझे सुलाया था रात रात भर
हाँ तुम्ही हो जिसे पाने छोड़ आयी वो सावन
वो झुले वो सखियों का साथ मनभावन
अब तो तुम ही मेरे मन के मीत ,प्रेम की मूरत हो
माँ कहती है अब तुम्ही मेरे ईश्वर की सूरत हो
सजना अब सात फेरो का साथ निभाना तुम
जब भी रूठ जाऊं तो प्यार से मनाना तुम
कृष्णा की ✍️कलम से

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