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हे! नवदुर्गा ! , हे! परमेश्वरी!
हे! परम पूज्य माता,
इस पर्व पर मेरी विनती... तुझसे कुछ विशेष रहे।
हे!पहाड़ों वाली माता!!
विषमता में समता दे ,
सबके लिये रहे.. जब तक ये जीवन शेष रहे।।
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हे! त्रिनेत्र धारिणी!!
अच्छे बुरे का अंतर कर सकूं,
तीसरी नेत्र सा माता... मुझको भी संज्ञान रहे।
हे! बहुभूजा धारीणी!!
कर्तव्य निर्वहन कर पाऊं भली भांति
बल मेरे हाथों को... तेरी भुजाओं समान रहे।।
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हे! अनन्त रूपों वाली!!
तेरी तरह जटिलता में भी,
सरलता का सुंदर रूप... मेरा भी प्रतिवर्ष रहे।।
हे! मनोहारिनी माता!!
नारी रूप में संपूर्ण बन,
वंश बेल बढ़ाने का... सौभाग्य मुझे सहर्ष रहे।।
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हे! शक्तिरूपा!!
शक्ति रूप से सदा सराबोर रहूं,
प्रयोजन से अस्त्र शस्त्र का... सार्थक योग रहे।
हे! विद्यादायिनी!!
झोली इतनी मेरी भर देना की
शिक्षा संग विनम्रता का भी... मन में प्रयोग रहे।।
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हे! शिवप्रिया!!!
अपने पति की प्रिय रहूं सदा,
संग पिया का मेरे जीवन में... मुझे प्रतिपल रहे।
हे! महामाया!!!
मायके की भी दूलारी रहूं,
नसीब में मेरे... मेरा मायका आज और कल रहे ।।
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हे! विन्ध्येश्वरी!!
देहरी मायके की चूम पाऊं,
तेरी भांति... स्वयं की माता का भी नमन रहे।
हे! विन्ध्यवासिनी!!
उस दरवाजे पर मेरी प्रतिक्षा रहे,
गरिमामय रूप में... मेरा भी नैहर आवागमन रहे।।
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हे! करुणामयि!!
नारी सर्वांग रूपिणी तू,
सर्वगुण संपन्न तुझ सा... मेरा भी नारी रूप रहे।
हे!शेरा वाली मां!!
अबकी दशहरा वर देना,
सदा संग मेरे... तेरा यह आत्मबल अचूक रहे।।
🌺 🌹--जय माता दी--🌹🌺
मौलिक व स्वरचित:- कीर्ति रश्मि "नन्द
( वाराणसी)

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