रोज की किचकिच से मैं तो तंग आ चुकी हूं। पता नहीं मेरे भाग्य फूटे थे ,जो इस घर में आई। कपड़े फैलते हुई अंजली बड़बड़ा रही थी ।
रविवार का दिन था,समीर भी घर में था ,दो बच्चे ,आस्था,और कुणाल टीवी पर लगे थे।
अभी फोन पर मम्मी से बात कर अंजली मशीन से कपड़े निकाल फैलाने आई कि बाबूजी ने चाय की मांग कर दी।
इससे अंजली और झल्ला गई थी।
बालकनी से मिसेज भल्ला उसको देखते ही बोलीं क्या बात है अंजली क्यों बडबडा रही हो?
कुछ नहीं भाभी,वो पापा जी ,दिन भर कुछ न कुछ उन्हें चाहिए ।
मम्मी जी के गुजरे 2 साल हो गए।अब उनको समझना चाहिए कि कुछ मांगें कम कर दें,मुझे भी बहुत काम होता है ,इनकी फरमाइशें ही पूरा करती रहूं क्या?
काम निपटा कर मेरे घर आना ,मिसेज भल्ला बोली ,मैं तुम्हें इस परेशानी से बचने का रास्ता बताऊंगी।
सच भाभी_अंजली खुशी से उछल गई ।
लेकिन भाभी आज तो सब घर पर हैं,कल आऊंगी ,दुखी होते हुए अंजली ने कहा।
कोई बात नहीं कल आ जाना ,कल 12 बजे से हमारे घर किटी हैं,महिलाएं आएंगी उनसे भी तुम्हारा परिचय करवा दूंगी।
मिसेज भल्ला,एक आकर्षक व्यक्तित्व की मालकिन ,छोटे छोटे बाल जिसपर हाईलाइटर से रंग दिया गया था ,महंगी हैंडलूम की साड़ियां,स्लीवलेस ब्लाउज उम्र 50 के वय की थी ,बच्चे विदेश में पढ़ते थे, घर में सिर्फ वो और मिस्टर भल्ला ही थे ।अभी कुछ दिनों पहले ही वो अंजली के सामने वाले फ्लैट में शिफ्ट हुई थीं।
लेट नाइट पार्टी,डिनर , टूर ,ये सब महीने में उनके घर होते रहते ।
दोनों पति पत्नी हमेशा खुश दिखते ,निकलते तो बाहों में बाहें डाले ऐसा लगता जैसे अभी अभी उनकी शादी हुई हो।
अंजली का भी सपना था कि उसका पति भी उसे खूब घुमाए,पिक्चर दिखाए,बाहर डिनर कराए ।
शादी करके आई ,तो सास ससुर और समीर थे। 4 सालों में दो बच्चे भी हो गए।सास बीमार रहने लगीं ,उनकी भी देख भाल ,कुछ महीने बाद ही वो चल बसीं।
ससुर जी रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी थे।
उन्होंने ही जिस फ्लैट में वो लोग रहते थे ,उसे खरीदा था।
सब कुछ उनका समीर का ही था ,तब भी अंजली सीधे मुंह बात नहीं करती । जब कभी वो बच्चों को डांटती तो समीर के पिता बीच में बोल देते ,फिर तो उस दिन पूरा आसमान सर पर उठा लेती अंजली।
समीर से खूब झगड़ा करती कि पापा जी मेरे बच्चों को बिगाड़ रहे हैं।
उसकी कोई सहेली आ जाए और राकेश जी उनसे हाल चाल पूछ लें तो भी वह चिल्लाने लगती कि औरतों से बात करने में उन्हें बड़ा मजा आता है।कोई प्राइवेसी ही नहीं है इस घर में।
कहीं जाना चाहो तो जा नहीं सकते पापा कैसे अकेले रहेंगे ,बड़े आए हैं पापा के श्रवण कुमार ये हमेशा सुनाती रहती समीर को।
अगले दिन सोमवार को समीर और बच्चों को भेज ,पापा जी को चाय नाश्ता देकर वह मिसेज भल्ला के घर गई।
दरवाजा उनकी नौकरानी ने खोला ,अंदर कमरा क्या था,इतना शानदार की होटल भी फेल था,महंगे महंगे सोफे,लाखों के झूमर,इंटीरियर बहुत ही आलीशान था।
वह झिझकते हुए आगे बढ़ी ।मिसेज भल्ला उठकर आईं और बहुत सत्कार के साथ उसे अपनी सहेलियों से मिलवाया।
वो सभी ज्यादातर अर्ध नग्न ही थी ,उनके कपड़े बदन पर न के ही बराबर थे। मिसेज भल्ला ने भी काले रंग की गाऊन पहन रखा था,और वो बहुत ही सुंदर लग रहीं थीं।
अंजली की आंखें एक दम से चौंधियां चुकी थीं,वही एक थी जो उनके बीच पूरी गंवार लग रही थी।
महिलाएं बड़े बड़े घरों की थीं।उन्होंने किटी की ,खेल खेला ,फिर कोल्ड ड्रिंक की जगह महंगी महंगी बीयर,व्हिस्की का सेवन किया।
अंजली वहां के वातावरण में खुद को असहज महसूस कर रही थी।
उसने मिसेज भल्ला से इजाजत मांगी , बहाना बनाया कि उसके बच्चे स्कूल से आ गए होंगे।
घर लौट उसने पानी पिया ,लेकिन मिसेज भल्ला का वो रूप उसकी आंखों के सामने नाच रहा था।
थोड़ी देर बाद खाना बनाया,उसके बाद उसने राकेश जी को खाना दिया।
राकेश जी ने बहुत जमाना देखा था।उन्हें मिस्टर भल्ला और मिसेज भल्ला ठीक नहीं लगते थे।
शाम को जब समीर आया तो अंजली ने खूब बढ़ चढ़ के मिसेज भल्ला की तारीफ की।
समीर को आसपास के लोगों के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं थी।
अब तो रोजाना ही अंजली मिसेज भल्ला के घर जाने लगी ।
उसका व्यवहार और भी बदल रहा था ,उसका ध्यान राकेश जी और बच्चों पर कम रहता। खाना भी जैसे तैसे बनाती।कभी नमक तेज तो कभी नमक गायब।
राकेश जी को बहु के रंग ढंग सही नहीं लग रहे थे।
उन्होंने समीर से शिकायत की।समीर भी समझ रहा था ,लेकिन बोल नहीं रहा।
आखिर एक दिन समीर ने अंजली को डांटा _क्या हो गया है तुम्हें? तुम्हारा ध्यान कहां रहता है ,न ढंग से किसी को खाना मिल रहा ,न बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रही हो।
पापा जी अगर बच्चों को पढ़ाएं तो तुम्हें तकलीफ , कि बच्चे बिगड़ जायेंगे।
अंजली समझ गई की ये सब आग पापा जी की लगाई है,वो बिफर पड़ी।
हां मेरा ध्यान नहीं है घर पर,कोई मैं तुम सब की बांदी हूं ,जो दिन रात तुमलोगाें के इशारे पर नाचूं।
पापा जी को तो कुछ काम है नहीं उनका ध्यान तो मेरे पर ही रहता है ,उन्हें मेरी खुशी देखी नहीं जाती ।
उसके बाद त्रिया चरित्र वाला ड्रामा _(रोते हुए) कहां जाती ही हूं,ऊबती हूं तो मिसेज भल्ला के घर चली जाती हूं,वो भी खटकता है किसी किसी को।
किसी तरह चुप कराया समीर ने _अच्छा बाबा चुप हो जाओ,जहां जाना हो जाया करो,लेकिन पापा जी और बच्चों का भी ध्यान रखो।
अंजली खुश हो गई।लेकिन इस घटना के बाद से अब वो हमेशा पापा जी को बुरा साबित करने में लग गई थी।मिसेज भल्ला ने उसे टिप्स दे रखा था कि घर की शांति चाहती हो तो अपने पापा जी को वृद्धाश्रम भिजवा दो,फिर पति तुम्हारी मुट्ठी में होगा। मैंने भी अपने ससुर जी के साथ ऐसा किया था,आज तुम देख ही रही हो ,हम कितने खुश हैं।
क्रमशः

1 टिप्पणियाँ