संयोगिता अपने बचपन की यादों में खोई हुई थी कि तभी किसी औरत के जोर जोर से चिल्लाने की आवाज़ आने लगी। आज सिस्टर मारिया अपनी बेटी मिशेल से मिलने गई थी क्योंकि आज उसका जन्मदिन था। संयोगिता अपने कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में आ गई। वहां उसने देखा कि एक स्त्री बदहवास हालत में चीख रही है, चिल्ला रही है। और एक आदमी उसे संभालने की पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन वो औरत उसके काबू में नहीं आ रही है। उसका पहनावा और हालत किसी की भी आंखों में आंसू ला सकते थे।22 -23 साल की उम्र में सफेद साड़ी में लिपटी हुई दुबली पतली सी लड़की जिसके माथे पर अभी भी बिंदी की हल्का सा निशान बना हुआ था। श्रृंगार विहीन उदास चेहरा, लगातार रोने से सूजी हुई बड़ी बड़ी आंखें , कमर तक लंबे लेकिन उलझे हुए बाल, चूड़ियों से खाली कलाइयां , जिसमें टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़ों से जख्म बन गए थे।खूबसूरत मुलायम नाजुक से पांव जिसमें बिछिया पहनने से बने निशान उसकी वर्तमान स्थिति पर रो रहे थे। जो पैर एक छोटा सा कंकड़ भी बर्दाश्त नहीं कर पाए उन पैरों में चप्पलें भी नहीं थी ।नंगे पांव वो आश्रम में खड़ी थी। तभी संयोगिता उसके पास आती है और उस औरत को अपने सीने से लगाकर उसके पीठ पर हाथ फेर कर उसे दिलासा देने लगती है। आश्चर्य तब होता है जब वो औरत एकदम सामान्य हो जाती है और उसकी ओर देखकर फूट फूट कर रो पड़ती है। संयोगिता ने उसे रोने से नहीं रोका। पता नहीं कब का गुबार उसके अंदर भरा हुआ हो, पता नहीं क्या क्या उसने झेला हो अपने जीवन में? रो लेने से शायद उसका दर्द आंसुओ के रास्ते बाहर निकल जाए। वो बस उसे धीरे धीरे उसके सिर पर हाथ फेरती रही। वो आदमी उसे गौर से देख रहा था। उस आदमी की उम्र भी लगभग 26 वर्ष थी ।वो उस औरत की हालत देखकर बहुत दुखी दिखाई दे रहा था।लेकिन संयोगिता की तरफ से उसकी निगाहें हट ही नहीं रही थी। वो उसके शालीन और विनम्र स्वभाव और मासूमियत से बहुत प्रभावित था। संयोगिता की निश्छलता उसे अपनी ओर खींच रही थी। ऐसा लग रहा था मानो वो उसे जन्मों जन्मों से जानता है। वो उसकी रूह में बसी हुई है।
लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? उसने तो आज के पहले संयोगिता को कभी देखा ही नहीं था। फिर उसके प्रति इतना आकर्षण क्यों? क्यों उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि जिसे वो खोज रहा था वो अब जाकर उसे मिली है। फर्स्ट साइट लव पर वो विश्वास नहीं करता लेकिन वो तो उसे अपनी बिछड़ी हुई साथी जैसी लगी।
इधर जब वो औरत थोड़ी सी सामान्य हुई तो धीरे से संयोगिता ने उसे अलग किया। उसे एक गिलास पानी दिया जिसे वो एक ही सांस में पी गई और अब सूनी सूनी आंखों से संयोगिता को देखने लगी।
तब संयोगिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उससे कहा
देखिए , आप हमें अपनी बड़ी बहन के समान समझिए । आप हमसे बिना किसी संकोच के अपनी सारी समस्या कह सकती हैं। क्या हुआ आपके साथ ? आप यहां क्यों आई। और इतनी छोटी सी उम्र में आपके साथ ये सब कैसे हुआ ? अपने अंदर छिपे हुए अथाह दर्द को बाहर निकालिए।
वो औरत कुछ न बोली चुपचाप आंखों में आंसू भरे हुए उसे देखती रही। और अचानक बेहोश हो गई। संयोगिता और वह आदमी दोनों घबरा गए । संयोगिता उसे उस आदमी की मदद से अंदर ले गई और अपने बिस्तर पर लिटा दिया। इसके बाद डॉक्टर को बुला कर उसका चेकअप कराया तो डॉक्टर ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है कमजोरी और प्रेगनेंसी की वजह से ये बेहोश हो गई हैं। असल में ये कई रातों से सोई नहीं है इसलिए मैने इन्हे नींद की दवा दे दी है। जिससे इन्हें आराम मिलेगा।डॉक्टर उसके लिए कुछ दवाएं और लिखकर वहां से चला गया। उसे आराम करने के लिए छोड़कर वो दोनों आ गए। संयोगिता ने उससे पूछा
आप कौन हैं इनके? इनकी ऐसी हालत कैसे हुई? कौन है ये? आपके ऊपर ये चिल्ला क्यों रही थी?
मैम, हमारा नाम संतोष सिंह राठौर है हम लोग इलाहाबाद के रहने वाले हैं ये हमारी भाभी हैं, हमारा भी एक हंसता खेलता परिवार था । हमारे पिता जी, मां,दो बहनें ,बड़े भैया,और भाभी। ईश्वर ने हमारे परिवार को भरपूर खुशियां दी थी। अभी दो साल पहले इनकी शादी हुई है । और अब हमारे घर में कुछ महीनों बाद एक नन्हा मेहमान भी आने वाला था । सारा परिवार बहुत खुश था ये खबर सुनकर । भैया उसी खुशी में आज से पंद्रह दिन पहले मिठाई लेने मार्केट गए थे । जहां मेरे भैया की एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई ।और हमारे हंसते खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गई। तब से इनकी हालत एकदम पागलों की तरह हो गई है। हर समय रोती रहती हैं। कहते कहते संतोष की आंखों में आंसू भर आए। और वो औरत भी दहाड़ मारकर रोने लगी। बड़ी मुश्किल से संयोगिता ने उसे चुप कराया।
ये तो बहुत ही दर्दनाक हादसा हुआ है आपके परिवार के साथ, खासकर इस लड़की के साथ। इतनी छोटी सी उम्र में पति का इस दुनिया से चला जाना बहुत ही दुखदाई होता है। इनका दर्द हमें अपने दिल की गहराइयों से महसूस हो रहा है। हम समझ सकते हैं कि क्या बीत रही होगी इन पर?इनकी ऐसी हालत देखकर ही हमें रोना आ रहा है। लेकिन एक बात बताइए क्या आपकी मां और और पिता जी ने इन्हें घर से निकाल दिया है जो ये इस आश्रम में रहने आई हैं। क्या उनका व्यवहार इनके प्रति अच्छा नहीं है।
संतोष ने संयोगिता को टोकते हुए कहा
अरे नहीं मैम, ऐसा कुछ भी नहीं है। भाभी के बिना तो हमारा परिवार ही अधूरा है, लेकिन भैया के तेरहवीं संस्कार में हमारी बुआ आई थीं । वो मां से कह रही थी कि भाभी के पैर घर के लिए अच्छे नहीं हैं। ये हमारे घर के लिए मनहूस हैं । इनको यहां मत रखो इनके मायके भेज दो। या तो इलाहाबाद ले जाकर किसी विधवा आश्रम में छोड़ देना । मेरी मानो तो इस मनहूस औरत का साया भी संतोष पर मत पड़ने देना । वरना इसकी काली छाया उसे भी अपनी गिरफ्त में ले लेगी। अब तो आशुतोष भी नहीं रहा अब क्यों यह इस घर में पड़ी हुई है। शायद भाभी ने यह बात सुन ली थी और अपने आपको खत्म करने रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी , मैने इन्हें जाते हुए देखा तो इनके पीछे पीछे आ गया और इन्हें मरने से बचा लिया। तब से ये मेरे ऊपर चिल्ला रही हैं और एक ही जिद पकड़ कर बैठ गई हैं.......

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