मैं डॉक्टर नीना एक  बड़े गुनाह के साथ अब जी नहीं सकती,लेकिन मरने से पहले मैं दुनिया समाज के सामने अपना गुनाह कबूल रही हूं।

बात उन दिनों की है ,जब मेरा  एमबीबीएस में चयन हुआ।
घर से दूर बनारस के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में मेरा दाखिला हुआ। लोगों की सेवा की शपथ खा मैने पढ़ाई की शुरुवात की।
चतुर्थ साल में हॉस्पिटल ने ड्यूटी लगती ,जिस जिस डिपार्टमेंट में हमारी ड्यूटी लगती वहां मेरा मरीजों के बीच स्नेह का  रिश्ता बन जाता।
अधीरा ,एक प्यारी बच्ची थी ,उसे टायफाइड हो गया था,वह मुझे बहुत प्यार करती थी और दीदी कह कर बुलाती थी। मैं रोजाना एक बार जरूर उससे मिलती ,चाहे मेरी ड्यूटी किसी भी डिपार्टमेंट में लगी हो।

रात के 11 बजे होंगे हॉस्पिटल  का वार्ड बॉय  निरंजन हॉस्टल आया,और वहां वार्डन से कहने लगा, कि  अधीरा की तबियत खराब है डॉक्टर देख रहे हैं लेकिन वह बार बार दीदी दीदी बोल रही।
दीदी यानी नीना । आप नीना को भेज दीजिए।

जब वार्डन ने बताया तो मैं तुरंत अधीरा को देखने दौड़ पड़ी।
वार्ड ब्वाय  के तेज कदम मेरे साथ ही थे।हॉस्पिटल और हॉस्टल के बीच एक हॉस्टल और पड़ता था ,जो अभी खाली था ।
अचानक उसने पीछे से मेरा मुंह दबा दिया और लगभग घसीटता हुआ उस हॉस्टल में ले गया।जहां उसने मेरे साथ बलात्कार किया।
उसके बाद उसने मुझे धमकी दी कि ,अगर तुमने मुंह खोला तो मैं तुम्हारा करियर बरबाद कर दूंगा।

वार्डब्वाय  की नौकरी , उसके विधायक साले ने लगवाई थी ,इसलिए सब उससे डरते थे ।वह ड्यूटी नहीं करता था ,कोई उससे कुछ कह भी नहीं सकता था।जिसने भी जुबान खोली वो,फिर कभी बोलने लायक नहीं रहता था।
उसके बाद से मेरा जीवन ही बदल गया,बहुत बोलने वाली,चुलबुली लड़की से मैं शांत,और एक दम दब्बू होती गई। मैंने ये बात सिर्फ अपनी सहेली रंभा को ही बताई थी।

कुछ ही दिनों बाद वो वार्ड ब्वाय भी कॉलेज से चला गया,शायद कहीं और किसी जगह उसकी नौकरी  विधायक  ने लगवा दी  थी।

अब मेरा डर तो कम हो गया था ,लेकिन अपमान और कुंठा मेरे अंदर ज्वाला बन धधक रही थी।
मैने अपनी एमडी (साइकेट्री ) में की,और मेरी नौकरी लगी, रांची में कांके स्थित केंद्रीय मनोविज्ञान संस्थान में।

जीवन पटरी पर आ गई थी।शायद अब मुझे किसी से प्यार भी हो गया था,मैंने पियूष को अपने साथ हुए हादसे के बारे में पूरी बात बता  दी थी,लेकिन उसे मेरे अतीत से कोई लेना देना नहीं था।वह मुझसे प्यार करता था,मेरे शरीर से नहीं।

मैं खुश थी,लेकिन मैं अपने रिश्ते को थोड़ा समय देना चाहती थी।
पियूष को कोई आपत्ति नहीं थी ,उसे मुझ पर पूरा भरोसा था।
मैं कभी कभी प्राइवेट मरीजों को भी देख लेती थी।
आज ड्यूटी का ऑफ था ,मैने सोचा अपने बचपन की सहेली से मिल आऊं,उसकी शादी यहीं रांची में हुई थी , मैं पढ़ाई के कारण शादी में सम्मिलित नहीं हो पाई थी।
उसने मुझे फोन पर अपना पता दिया था,जब मेरी रांची नौकरी लगी तो मैं बहुत खुश हुई कि , मैं अब अर्चना से मिलने जाऊंगी ।

मां ने भी मुझे बार बार कहा था कि छुट्टी के दिन एक बार जरूर अर्चना से मिल आना।
हम दोनों मिले ,एक अरसे के बाद मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा ,उसने कहा चल कहीं घूम आते हैं,यही बगल में रॉक गार्डन है ।

मैने कहा रहने दे, अब तो यहीं रहना ही है ,फिर कभी चलेंगे।
उसके बाद हमने खूब बातें की।उसके घर में पति और उसके अलावा कोई नहीं था।उसके पति सीएमपीडीआई (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट लिमिटेड )में इंजीनियर थे।
जो कोल इंडिया का ही भाग है।

पूरा दिन बिताने के बाद मैने कैब लिया और वापस  ,जब फिरायालाल पहुंची तो जाम लगा था ।मैने कार से झांक कर देखा तो एक लंबा चौड़ा कार वाला रिक्शे वाले से झगड़ा कर रहा था,मेरी स्मृति में वही वार्ड ब्वॉय निरंजन का  चेहरा कौंध गया। उस वहशी को मैं कैसे भूल सकती थी।

मैने वहीं कैब छोड़ दिया और उतर कर आस पास के लोगों से जो  तमाशा देख रहे थे उनसे पूछा ये कौन है? एक व्यक्ति ने बताया ये बहुत बड़ा ठेकेदार है ,कोल इंडिया का टेंडर लेता है।
इतना जानने के  बाद मैं निश्चिंत हो गई  कि अब मैं उसके तक पहुंच जाऊंगी।

उस निरंजन को देख मेरे अंदर भेड़िए के जैसी चमक आ चुकी थी।और मेरा दिमाग लोमड़ी की तरह सोच रहा था।

मैं अपने क्वार्टर आ गई।मैने अर्चना को फोन किया ,सुन अर्चू मुझे तुझसे  हेल्प लेनी  है।
हां बोल न नीना ,मैं तेरी क्या मदद कर सकती हूं।
मुझे निरंजन नाम के व्यक्ति जो कोल इंडिया में ठेकेदार है, उसकी पूरी जन्म कुंडली चाहिए।
मिल जाएगा _अर्चना ने मुझे भरोसा दिलाया।

एक सीधी साधी लड़की को समाज के कुछ वहशी दरिंदों ने शातिर अपराधी बना दिया।मेरा दिमाग एक अपराधी की तरह काम कर रहा था।

क्रमशः