बहुत सम्भला पर दिल न सम्भला
कर बैठा है दिल तुमसे ही दिल लगी
ज़ब होगया जिना मुश्किल ओ सनम तेरे बिन
तो कर लिया एकरार ज़ब दिल ने कहाँ
अब इनकार करने का कोई मतलब न रही....!!
न सोचा था कभी ज़िन्दगी में जो
आज दिल ने वो गुनाह कर बैठा
ज़ब अहसास हुआ तो जाना की
मैंने इश्क़ में क्या जुलुम कर दिया की
अब इनकार करने का भी कोई मतलब न रही.....!!
धीरे धीरे ज़िन्दगी में जो तेरा अनाजाना हुआ
जाने कब इस दिल में सनम तेरा ठिकाना हुआ
होगया दिल तेरा होके इसे ज़रा भी मेरी परवाह नहीं
जाने क्या तुमने जादू किया की हर अहसास तेरा हुआ
की अब इनकार करने का कोई मतलब न रही....!!
ज़ो राज़ जहाँ से छुपायी वो पल में तुमने खोल दिया
बहुत कोशिश की मैंने अहसास रोकने की
पर आँखों ही आँखों में सब कुछ बोल दिया
जाने कैसी मदहोशी छायी या इश्क़ का कोई असर हुआ
की अब इनकार करने का कोई मतलब न रही....!!
यादो में तेरा ही पहरा नींदो में भी बसें हो तुम
किस गलती का सज़ा है ये जो ए दिल ऐसा कर बैठे तुम
चाहत है गहरी इतनी की तुम्हे भी दोष देना सही नहीं
सज गए हो नैना के सपनो में कुछ इस तरह सनम मेरी
की अब इनकार करने का कोई मतलब न रही.....!!
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नैना.... ✍️✍️

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