कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ ,
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं |
खो गया इंसान जिंदगी दौड़ में,
भूल गया वह शाम सपनों की होड़ में,
आओ फिर से वही शाम करते हैं |
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं
मिलते थे थके मांदे वे दोस्त सारे
पीपल के चबूतरे पे या घर के द्वारे
आ बैठ फिर वहीं आलाप करते हैं |
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं
कितना हसीं था दौर मिलते थे बार-बार
होती थीं ठिठोलियाँ लड़ते थे यार
चल न, फिर से बातें दो चार करते हैं |
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं
वक्त ही तो नहीं आदमी के पास
फंस गया जरूरतों की उहापोह में
चल आ, अब तो थोडा आराम करते हैं |
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं
आ बैठ कुछ बात करते हैं,
कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ ,
जिंदगी से फिर मुलाक़ात करते हैं |
💐💐💐प्रितम वर्मा🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

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