तुम कैसी हो?
मीरा जी ने जैसे संदेश पढ़ा ,वो खुद को वही 18 साल पहले की अल्हड़ नवयुवती महसूस करने लगीं,वही अहसास ,जैसे नदी पहाड़ों से निकलती मदमस्त,इठलाती ,अल्हड़ बहती है।
उनके होंठ खुद ब खुद ये गीत गुनगुनाने लगे
पहला नशा ,पहला खुमार
नया प्यार है नया इंतजार
कर लूं मैं क्या अपना हाल
ऐ दिले बेकरार।
वो अपने बीते समय में लौट चुकी थीं,वो भी क्या दिन थे ।
बस स्टैंड पर कॉलेज की बस का इंतजार करती वो अपनी दोस्तों के साथ बात में मशगूल वो खड़ी थीं।
तभी सामने से एक बहुत स्मार्ट लड़का गुजरा।उसे अपने मोहल्ले में मीरा ने पहली बार देखा था।
अब तो अमूमन रोजाना ही कॉलेज के समय वो दिख जाता था।
छुट्टी का दिन था , मीरा के घर के पिछवाड़े आडू का पेड़ था , उस समय आडू पक गए थे ,वह निकली तो देखा सामने के घर में वही लड़का टहल रहा था,दिल धक से हो गया।
उस लड़के की नजर जैसे पड़ी उसने मुस्कुरा दिया।मीरा तुरंत अंदर आ गई।
मां मां,_मीरा चिल्लाई।
क्या हुआ_मां ने कहा।
मां ये अपने सामने कोई नए लोग आए हैं क्या?
मां ने कहा _हां ,उन्हें आए 15 दिन हो गए।
बड़े अच्छे लोग हैं।
अच्छा कह कर मीरा कुछ न बोली।
लेकिन अब बहुत सवाल थे ,लेकिन मां से कैसे पूछे।
पड़ोस में ही उसकी अच्छी सहेली रहती थी, दोनों अपने दिल की बातें एक दूसरे से साझा किया करती थी।मीरा पहुंच गई अपनी सहेली नंदा के पास।
दोनों एक कमरे में बैठ गईं,नंदा के पिता नहीं थे , मां और भाई था।भाई इस समय कोचिंग में गया था ,और मां खाना बनाने में लगी थीं।दोनों को अच्छा एकांत मिल गया,।
मीरा ने पूछा ,नंदा तुझे मालूम हैं,मेरे घर के पीछे, वाले घर में नए किराएदार आए हैं।
हां, वही लड़का तो है जो हमारे कॉलेज टाइम बस स्टैंड के सामने से गुजरता है ,ओह तो तुझे नहीं मालूम था क्या ?_नंदा ने बेफिक्र हो जवाब दिया।
क्यों बड़ी पूछताछ कर रही , कहीं तेरा दिल तो नहीं आ गया ?_नंदा ने धूर्तता भरी नजरों से मीरा को देखा।
नहीं मैं तो बस यूं ही पूछ रही थी_मीरा ने कहा।
मैं उसके बारे में पूरा पता करके बताती हूं,उसकी मां के साथ मेरी मां की अच्छी दोस्ती हो गई है।
मीरा ने अहसान भरी नजरों से नंदा को देखा ,लेकिन कुछ कहा नहीं।
अच्छा मैं चलती हूं, मां गुस्सा हो रही होगी,उठते साथ तेरे घर जो आ गई_मीरा ने कहा।
नंदा उसे बाहर तक छोड़ आई।
मीरा के कमरे की खिड़की ,उसके कमरे की खिड़की के सामने ही थी ,लेकिन उधर की खिड़की पहले बंद ही रहती थी।
आज मीरा ने उस खिड़की को खोलदिया।
मां ने पूछा इधर की खिड़की क्यों खोल रही ,?
अरे मां देखो ना बंद होने की वजह से खिड़की जाम हो गई है,मकड़ियां का भी जाला लगा है।
अच्छा,कहती हुई मीरा की मां कमरे से चली गईं।
मीरा ने खिड़की के पास अपनी टेबल लगा दिया ,और वहीं बैठ कर पढ़ने लगी,लेकिन निगाहें उसके कमरे का एक्स रे कर रही थीं।
दो तीन बार काम के लिए मां ने बुलाया,बड़ी खीज लग रही थी ,मीरा को उठने में।
आखिर इंतजार के बाद अमित बाबू के दर्शन हो ही गए मीरा को।
दिन के करीब 1 बजे के वह अपने कमरे में आया।खिड़की का परदा बंद करने ही वाला था कि ,उसकी नजर मीरा की खिड़की पर गई और वो भी ठिठक गया,उसने परदा नहीं बंद किया ,और वहीं अपने बिस्तर पर बैठ गया,शायद उसका बिस्तर खिड़की के सामने था।
मीरा को इतनी खुशी तो अपने हाई स्कूल ,इंटर में फर्स्ट आने पर नहीं मिली।
पहले प्यार का अंकुर प्रस्फुटित हो गया था।
आंखें चार होने की गवाह वो खिड़की बन रही थी,वही खिड़की जो आज से पहले मीरा की हमेशा बंद रहती थी।
खिड़की के रास्ते दो दिल एक दूसरे की चुपचाप पैगाम पहुंचा रहे थे।
दूसरे दिन ,नंदा और वो जब कॉलेज के लिए निकली ,तो उसके घर के सामने से निकली,वो तैयार हो अपनी बाइक स्टार्ट कर रहा था,शायद उसके ऑफिस जाने का समय भी यही था।
नजरें मिलीं ,दोनों मुस्कुरा उठे।
क्रमशः

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