"तुम्हें भूलना चाहूँ मगर भूल पाती नहीं,
ये तेरी यादें क्यों दिल से जाती नहीं?
मेरी ख्वाहिश में तू, ख्यालातों में तू,
बातों में तू, जज़्बातों में तू
और आंसू भरी सारी यादों में तू ।।
तू कहां है नहीं , जान पाती नहीं।
ये तेरी याद क्यों दिल से जाती नहीं?
चुभती सौगातो में,चांदनी रातों में ।
मेरी परछाई बन तू रहा साथ में।।
बिन तेरे आज मैं, मुस्कुराती नहीं।
ये तेरी याद क्यों दिल से जाती नहीं?
चाहती हूँ मिटाना तुझे हर घड़ी।
मेरे अस्तित्व पर तेरी यादें जड़ी।।
तेरी चाहत ऐंसी हुई बावरी।
सामने दिख रही मुझको, उलझन बड़ी।।
मेरी धड़कन मेरे, साथ आती नहीं।
ये तेरी याद क्यों दिल से जाती नहीं?
है उजाले में तू, और अंधेरे में तू।
मुझको लगता है, बांहों के घेरे में तू।।
सांस के आने, जाने की लय में लगे।
जैसे है सांस के, सारे फेरे में तू।।
प्रीत की राह क्यों, छूट पाती नहीं।
ये तेरी याद क्यों दिल से जाती नहीं?
चाहती हूँ भूलाना, मैं मजबूर हूँ।
दिल में तू बस गया, मैं भले दूर हूँ।
दिल की धड़कन, से आवाज आई यही।
तू मेरा नूर है, मैं तेरा नूर हूँ।।
अंबिका प्रीत क्यों, ये लजाती नहीं।
ये तेरी याद क्यों दिल से जाती नहीं?
अम्बिका झा ✍️

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