लोगों में जब चेतना जग जाएगी
दुनियां ये सच में बदल ही जायेगी

सिर्फ नवरात्रों में हीं नहीं
वर्ष भर मां तुम्हारी कृपा हो जाएगी

तू ही है मां कन्या रूप में
तू ही है मां स्त्री रूप में

लोगों को जब ये समझ आ जाएगी
हत्या न फिर कोख में की जाएगी

पूजा फिर सबकी सफल हो जायेगी
दुनियां ये सच में बदल ही जाएगी

छोड़ कर आडंबरों को
जो तुम्हें मन से ध्याये

सिर्फ नवरात्रों में हीं नहीं
हर रोज तुम्हारी कृपा पाए

ज्योति फिर विश्वास की जग जाएगी
मां तुम्हारी जब कृपा हो जाएगी

छोड़ कर मां द्वेष भाव को
छोड़ कर मां भेद भाव को

जो तुम्हारी शरण आए
वो भव सागर से तर जाए

लोगों को जब ये समझ आ जायेगी
भक्ति फिर उनकी सफल हो जाएगी

लोगों में जब चेतना जग जाएगी
दुनियां ये सच में बदल ही जायेगी

सिर्फ नवरात्रों में हीं नहीं
वर्ष भर मां तेरी कृपा हो जाएगी

कविता गौतम...✍️
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