रात भीगी झिलमिल सितारे
चिर विकल हैं प्राण मेरे

स्मृति में छवि तेरी आती रही
गा रही सांसें मधुगीत तेरे

जल रहे दीप आस के फिर भी
तिमिर न साथ छोड़े मीत मेरे

पनघट में लौट आती हैं बहारें
जब भी आंचल स्नेह का संवारे

प्रीत को कर मुझे समर्पित तुम
रच बस जाओ अंतर्मन में मेरे