बहु मूल्य मानव जीवन, पल पल बिता जाए
आँख खुले जब बीते उमरिया ,तो मनवा बहुत पछताय

राम के बन्दे है हम सब ने, राम से नाता जोड़ले 
भूल भुलैया में ना पड़ आब,दिल की नैना खोलले
मिल जाये किस भेस में बाबा, यह कोई नही है जानी
      कर मानावा आब राम भजन वरना पीछे पड़ेगी पछतानी।।

यह दुनिया दो दिन का मेला, यहां ना कोई तेरा
आँख खुले है जब तक जग में, सब है तेरा मेरा 
आँख बंद जब होजाये,तुझे कोई नही पहचाने
   कर मानावा आब राम भजन,,,,,,,,,,,,,,,,

प्रेम ही पूजा और ना दूजा,सबसे प्रेम तू करले
राम कृष्ण की है यह बड़ी,आपने आंग में भरले
धन बैभव के फंदे में फस कर,ना बन बैठा तू अभिमानी
     कर मानावा आब राम भजन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कहे प्रीतम हाथ जोड़कर ,सुन मेरा बहन भाई
पर उपकार करले जग में,तेरे जीवन सफल होजाई
पर उपकार ही परम् धर्म है,कह गए माहा मुनि ज्ञानी
    कर मानावा आब राम भजन ,वरना पीछे पड़ेगी पछतानी।।।।।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐