"मोहब्बत के कौल में वफ़ा दारी
             कौन करता है।

मोहब्बत  का  खेल  खुद, किसी
       कयामत से कम नहीं

    कयामत आने का इंतजार
           कौन करता है"

इश्क सफ़र में कोई खुद को 
         भुला भी दे कोई,

उसे खुद का ख्याल नहीं भला
    उसे याद कौन करता है।

ज़माने में कोई वफ़ा करने 
     की भी सोचे तो,

उसे नरक की ज्वाला में जलना
पड़ता है भला उसे बचाने की
    भी जुर्रत कौन करता है

                  
                  "कुमार "