खूबसूरत हंसी मैं प्यार का वो पल लिख दूं।
तेरे चेहरे को किसी झील का कंवल लिख दूं।
करीब आओ तेरी फूल सी हथेली पर
किसी गुलाब की डंठल से मैं ग़ज़ल लिख दूं।
करूं जो बात किसी से मैं सादगी की तो
किसी मंदिर के कलश का मैं तुझे जल लिख दूं।
बंद कर ले मुझे आंखों के आशियाने में
चाहता खुद को तेरी आंख का काजल लिख दूं।
संगेमरमर की दीवारों को देख दम घुटता
कहो तो फूस का तुझको कोई महल लिख दूं।
मेघ यादों के तुम्हारे ये दिल पे छाए हैं
तुझे आंखों से बरसता हुआ बादल लिख दूं।
सियाह रात की चुप्पी जो तोड़ देती है
तेरे पांवों की खनकती हुई पायल लिख दूं।
गमों की मार से आहत ये दिल हमारा है
नाम कैसे ये तेरे मैं दिल-ए- घायल लिख दूं।
फागुनी रात में "किंजल्क" से मिली आकर
कोई कह दे कि उसे कैसे मैं गरल लिख दूं।
🌺🌺🌺🌺🌺
--
किञ्जल्क त्रिपाठी "किञ्जल्क"
आजमगढ़ (उ.प्र)
(मेरी स्वरचित व मौलिक रचना)

0 टिप्पणियाँ