प्रकृति रखती है पांचों तत्वों में संतुलन।
जल से शीतलता अग्नि से ताप आकाश से शब्द संधान।।
पृथ्वी से हरियाली सूर्य से जीवन मंगल से ऊर्जा मिलता जीवन ज्ञान।
तीन गुणों से बनता व्यक्तित्व चलता जीवन।
शक्ति और शौर्य साहस मिलकर करते हैं समाज का निर्माण।।
हर एक का योगदान इस संसार में कोई आता है कोई जाता है यही है आधार।
आधा हिस्सा कठोरता का आधा कोमलता का यही है प्रकृति का संतुलन।।
खड़े पहाड़ बहती नदियां लहराते पेड़ कलरव करते पक्षी।
शक्ति का पर्व आराधना सृजन विजय का उल्लास भावना सच्ची।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर