नहीं होती केवल ईट सीमेंट से बनी इमारत
ये तो है संपूर्ण मानव निर्माण की नींव
जिस पर रखी जाती है संस्कारों की आधारशिला
जिसे तैयार किया जाता है ज्ञान की ईंटों से
काट छांट कर सुव्यवस्थित रूप से रखकर
जिन्हें पकाया जाता है अभ्यास के गर्म आंवे में
और जोड़ा जाता है लगन और दृढ़ता के सीमेंट से
उस स्कूल में बोए जाते हैं विभिन्न नस्लों के बीज
और सींचा जाता है शिक्षा और समर्पण से
दी जाती है खाद उन्हें स्नेह मिश्रित अनुशासन की
समय समय पर डांट और कठोरता की दरांती से
साफ किए जाते हैं विद्यार्थी के मन के खर पतवार
और वो तैयार हो जाता है एक सुंदर पौधे के रूप में
इस सृष्टि को अपने ज्ञान की सुगंध से महकाने के लिए
संगीता शर्मा

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