हाथ में लगी मेंहदी,
कर के सोलह श्रृंगार,
सिर पर लाल चुनरिया ओढ़े,
भूखी,प्यासी अपने पिया के लिए,
मांग में सिंदूर सजाए।
सज संवर कर, पूजा का थाल सजाए,
बैठी पिया के इंतजार में,चांद को निहारती हुई,
अपने चांद का इंतजार करती हुई,
कि कब आयेंगे पिया अपने हाथ से पानी पिलाने,
इंतजार हुआ पूरा निकल आया चांद,
छलनी से पहले चांद को देखा,
फिर अपने बलमा को प्यार से निहारती हुई,
लोटे से जल चढ़ाती हुई चांद को,
पिया ने प्यार से पानी पिलाया और मीठा खिलाया,
और गोद में उठाकर छत से नीचे लाते हुए करवाचौथ मनाया।
हरप्रीत कौर
दिल्ली