झुंड में पक्षियों का आत्महत्या करना किसी पहेली से कम नहीं ,लेकिन ऐसा होता है,दक्षिणी असम के दिमा हासो जिले की पहाड़ी घाटी में स्थित जटिंगा घाटी में।
यह घाटी पक्षियों की सुसाइड प्वाइंट के नाम से जानी जाती है।
हमेशा से पर्यटकों से घिरा चाय बागानों,और अपने मनोरम दृश्य के लिए ,असम जाना जाता है।
यहां अक्टूबर से नवंबर में कृष्णपक्ष की रात को अजीबोगरीब हादसा होता है।इस समय यहां नाइट कर्फ्यू लगा दिया जाता है।
शाम 7 बजे से लेकर रात 10 से 10.30 तक गहरा धुंध छा जाता है,हवाएं तेज चलने लगती है।आत्महत्या करने में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 40 से ज्यादा प्रजातियां होती हैं ।कहते हैं कि अप्रवासी पक्षी भी यहां आने के बाद वापस नहीं लौट पाए।
वैज्ञानिक इसका कारण ,अत्यधिक बारिश को बताते हैं उनका मानना है ,पंख गीले होने के कारण ये ठीक से उड़ नहीं पाते और तेज हवाओं के कारण ये देख नहीं पाते और घाटी में गिर जाते हैं।

वैसे  कारण कुछ भी हो लेकिन समूह में पक्षियों का आत्महत्या करना एक पहेली बना हुआ है।