जाने क्या नशा है तेरे मोहब्बत में सनम
क्यों तेरे सिवा इस दिल को कोई भाता नहीं है
जितना भूलना चाहा तुम्हे इस दिल ने
उतना ही इस दिल में तेरे लिए मोहब्बत बढ़ता जाता है
कौन सी गुनाह की थीं हमने जो प्यार किया
किस्मत ने ऐसा खेल खेला की तुमसे दूर कर दिया
जितना समझाती हूँ खुद को की अब सम्भल जा
उतना ही इस दिल में तेरे लिए मोहब्बत बढ़ता जाता है
जानती हूँ तुम्हारा भी कुछ ऐसा ही हाल होगा
मेरी तरह तुम भी मेरे याद में तड़पता होगा
जितना भी पहरा लगा दू तेरी यादो को रोकने की
उतना ही ये दिल तुम्हारे यादों में खोने लगता है
ये कैसा सितम है तकदीर का हम पर हुआ
क्यों वो चाहत भरे दिन हमसे यूँ जुदा हुआ
जितना भी कोशिश किया तुझसे खफा होने की
उतना ही इस दिल में तेरे लिए मोहब्बत बढ़ता जाता है
बहती है आँसू इन आँखों से जाने क्यों रुकता नहीं है
क्या कसूर है मेरा जो तेरे लिए ये जज़्बात रूकती नहीं है
जितना भी चाहे दुनिया मिटाने की चाहत नैना के दिल से
उतना ही इस दिल में तेरे लिए मोहब्बत बढ़ता जाता है....!!
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नैना.... ✍️✍️

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