तुम्हीं हो दुर्गे तुम्हीं हो काली,
तुम्हीं हो माता शेरावाली,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हारी महिमा मैं गाऊँ,
तुम्हारा ही मैं ध्यान लगाऊँ,
दया का भाव सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हारे को मैं सजाऊँ,
तुम्हारे चरणो में शीष नवाऊँ,
कृपा की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हारे मनमंदिर में बस जाऊँ,
तुम्हारे ही मैं गुणगान गाऊँ,
कृपा की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हारे वैभव को पाऊँ,
तुम्हारे सदाचार को अपनाऊँ,
दया का भाव सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.... 

तुम्हारे रुप को मैं ध्याऊँ,
तुम्हारे नयनों में बस जाऊँ,
कृपा की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हारा ही भक्त बन जाऊँ,
नैया मेरी पार लगाओ,
दया का भाव सदा ही रखना,
तुम्हीं हो दुर्गे.....

तुम्हीं हो दुर्गे तुम्हीं हो काली,
तुम्हीं हो माता शेरावाली,
तुम्हीं हो दुर्गे...।

   गीत रचना-रजनी कटारे
          जबलपुर ( म.प्र.)