ओ चांद ! आज तेरी प्रतीक्षा में मैंने
सारा दिवस जतन करते बिसार दिया ।
तेरी एक झलक पाने को "सुधांशु
तन मन अपना प्रसन्नता से संवार लिया ।।
अब मेरे प्रेम की परीक्षा ही नहीं "शशि
आज रजनी बेला में तेरा भी इम्तिहान है ।
भले ही लाख नखरे दिखला ले तू चंदा
आज अपनी गंभीरता को ग्रहण कर मैंने
सोलह श्रृंगार संग अब "सुशांत धैर्य धरा है ।
तेरी आभा में अपने पी का मुख देखूं
प्रत्येक दिन आज के लिए ये आस गढ़ा है ।।
पिया मेरे आज सुख के साथी बन
प्रत्येक भावनाओं को क्षण में जा रहे समझ।
पर ओ मयंक! तू तो यूं लजा रहा है
जैसे आती हो नववधू कोई उलझ उलझ ।।
व्रत करवाचौथ का उठा कर मेरे चंदा
आज निहारूं राह तेरी अपने "उनके संग।
आजा ओ! मेरे चांदनी युक्त धवल रजत !
बढ़ा दे मेरे माथे पे साजन के प्रीत का रंग ।।
--------------------
🌹करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं🌹
मौलिक व स्वरचित:- कीर्ति रश्मि "नन्द
( वाराणसी)
छायाचित्र :- आभार गूगल

0 टिप्पणियाँ