चादर तान कर सो रहे थे
दिल में बहुत सुकून था
इन आँखों ने लहू का समंदर देखा
खून से सनी धरती पे, मुबंई का मंजर देखा है
उफन रहा है नदियाँ मानो
बह रहा वहाँ खून था
दिल में बहुत सुकून था , दिल में बहुत सुकून था
हम सपनो में खो रहे थे
कुछ अपनों को खो रहे थे
बात सी एस टी, की हो, नमरीन ओबराय या ताज की
सबके जुबान पे एक खामोशी और दहशत रात की
देश भक्ति की चाह थी दिल में
अजब सा एक जनून था
दिल में बहुत सुकून था , दिल में बहुत सुकून था
चीख रहे थे मासूम वहाँ पे
चल रही थी गोलियां
बेटी पूछे पापा कब आओगे
इंतज़ार करूगीं आपका, भूल तो नहीं जाओगे
जन्म भूमि की खातिर,
खेल रहे थे खून की होलियाँ
कितने वीरो के खून बहे थे
हमें क्या मालूम था,
दिल में बहुत सुकून था , दिल में बहुत
सुकून था
शत शत नमन, उन वीरो को जिसने हमारी रक्षा की
मिट गए देश की खातिर, आंतकियो से सुरक्षा की
यादों की गाथा को मोती बन के पिरोते है
वो लडते है हमारी खातिर, चैन से हम घर पर सोते हैं
उफन रहा है नदियाँ मानो बह रहा वहाँ खून था
दिल में बहुत सुकून था , दिल में बहुत सुकून था
रंजना झा

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