नये विश्व का निर्माण हम करेगें
जीवन के हर पथ को खुशियों से भरेगें
मिटा घने अंधकार के तम को
आशा का दीप हम जला देगें
जो फैली है छूआछूत जैसी मानसिकता
ऐसी छोटी मानसिकता को मिटा देगें
मिले सबको बराबर का सम्मान
इंसानों मे एक नई आशा की किरण जगा देगें
जो फर्क समझते हैं बेटा और बेटी मे
उनकों भी भलीभांति समझा देगें
मत समझों बेटों से कम बेटियों
बेटियों के खातिर एक
नई पहल को चला देगें
जो समझते हैं बेटियों से ऊंचा बेटों को
ऐसी मानसिकता का हनन करा देगें
एक ही ईश्वर के बच्चे हैं हम सब
सबका करना सम्मान सिखा देगें
चलता है जाति पाति का ढोंग यहाँ पर
ऐसे ढोंग का विनाश करा देगें
न कोई छोटा है और न ही कोई बड़ा है
अमीर गरीबी का फर्क मिटा देगें
और जिनकों घमंड है अपनी अमीरी का
उनकों ईश्वर की लाठी का ज्ञान करा देगें
अरे जिसने हमकों बनाया है
जब उसने न देखी जाति पाति को
तो इंसान क्यों इसको बढ़ावा देता है
अमीरी गरीबी में करके फर्क
गरीबों के दिलों को ठेस पहुँचाता है
स्वरचित एवं मौलिक
"स्वेता मिश्रा"

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