जमाजमाने भर की खुशियाँ 
भी कम पड़ जाती हैं 
पापा  की कमी अब
तो पूरी नहीं हो पाती है ...

लडखडाते से कदम को, 
आपने संभाला है 
धूप में जलते हुए, 
दिया सबको निवाला है..

अनुशासन की मूरत पापा, 
सख्त कभी दिखते हैं 
बच्चो का सपना पूरा करते है 
 खुद बेमोल बिकते हैं ..

बच्चों के गूगल हैं पापा 
अम्बर हैं भूतल है पापा 
धैर्य का संबल है पापा 
संचित हर पल - "मन मंदिर" में 
ऐसा गुजरा कल हैं पापा ..

पापा की यादों में रो लेंगे 
फिर  से हम मुसकायेंगे 
उर में रहते हो" आप "
कभी अलविदा नहीं कह पायेंगे ...!!  😭

खिलौने की दुकान हैं पापा, 
खुशियों का आसमान हैं पापा..
होता नहीं असंभव कुछ भी 
ऐसे सख्स महान् है पापा ...

(पापा को अलविदा कहना बेटियों के वश की बात नहीं है। )