बाल दिवस है देखो आया,
चाचा नेहरू की याद दिलाया।
बच्चों के थे प्यारे चाचा,
प्यार थे बच्चों को करते।
बच्चों की खुशियों की खातिर,
काम बहुत वह करते थे।
गुलाब फूल पसंद बहुत था,
बच्चों को फूल समझते थे।
गुलाब की तरह ध्यान रखते,
बच्चे होते कोमल चंचल,
झगड़ते रहते मन निश्छल।
दिखाते गुस्सा दो पल का,
साथ मित्र का हरदम का,
माँ बाप की आँखों के तारे,
उनके जीवन के सहारे।
बच्चे जब खुश रहते है,
माँ बाप बहुत खुश होते।
उनके सुखी जीवन की सदा
प्रार्थना प्रभु से करते।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'