श्रेयांश का आज पहला दिन था,किसी तरह ऑटो पकड़ ऑफिस पहुंचा।
आज वो 20 मिनट देर था,पहले ही दिन और देर से।
ऑफिस में सभी अपने अपने काम में व्यस्त थे। उसे समझ में नहीं आ रहा था की कहां बैठूं।

तभी चपरासी श्रेयांश के पास आया,और उसे बॉस ने बुलाया है ,संदेश देकर चला गया।
वो डरता डरता बॉस के कमरे में पहुंचा ।बॉस महिला थी। उसने अभिवादन किया।
मैम माय सेल्फ श्रेयांश ,आपने मुझे बुलाया।
कुर्सी पर बैठी महिला मुड़ी ,श्रेयांश की आंखें फटी की फटी रह गईं।
कुछ देर तक श्रेयांश बुत बना खड़ा रहा, उसकी चेतनता शून्य हो रही  थी ।,आंखों जो देख रही थी वो सत्य नहीं  लग रहा था,उसे नौकरी की नितांत आवश्यकता थी अन्यथा वो वापस चला जाता।

सामने बॉस की कुर्सी पर राधिका थी।
वही राधिका जिसने उसके साथ हजारों सपने देखे थे,लेकिन श्रेयांश ने उसको कभी नहीं पसंद किया। दोनों कॉलेज में साथ साथ थे।हमेशा श्रेयांश उसके सांवले रंग पर मजाक उड़ाया करता था।
श्रेयांश उसका पड़ोसी था,राधिका सीधी सरल और कुशाग्र बुद्धि की थी ।श्रेयांश सजीला नौजवान ,कॉलेज की हर लड़की उसकी दीवानी थी ।राधिका भी मन ही मन उसे प्यार करती थी।
श्रेयांश की मां राधिका को पसंद करती थी ,राधिका खाली समय में उसकी मां की मदद किया करती थी।
बैचलर डिग्री  के बाद ,श्रेयांश को क्लर्क की नौकरी मिल गई।
रिश्ते आने लगे।राधिका की मां जानती थी कि राधिका श्रेयांश को पसंद करती है ।एक दिन उन्होंने राधिका के रिश्ते की बात श्रेयांश की मां से छेड़ा।
श्रेयांश की मां ने भी हामी भरी ,और श्रेयांश से पूछ कर बताने की बात कही।
श्रेयांश के लिए रोजाना ही अच्छे अच्छे रिश्ते आ रहे थे। मां ने श्रेयांश के मन में राधिका को लेकर कोई भावना है ,इसे लेकर उसके मन की थाह लेनी सोची।

शाम को जब ऑफिस से आया तो फ्रेश हो ,फोन लेकर बैठ गया। माँ चाय नाश्ता लेकर आई और पास बैठ गई ,उन्होंने श्रेयांश से कहा_ बेटा ,राधिका कितनी अच्छी है कितना ध्यान हमलोगों का रखती है।
श्रेयांश ने बात में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, हुंह !!! धीरे से चाय का प्याला होंठों से लगाये  फोन पर व्यस्त हो गया।

मां ने फिर कहा ,तेरी और राधिका की जोड़ी अच्छी रहेगी।
इतना सुनते उसके हाथ  से चाय का कप छूटते छूटते बचा ।
वह उठ खड़ा हुआ जैसे किसी ने बहुत अप्रिय बात कह दी हो।
वह फुफकारते हुए बोला , मां आपने कैसे सोच लिया , मैं उस काली चुड़ैल से शादी करूंगा।
वह मेरे सामने आती है तो मुझे उबकाई आने लगती है।इस जनम में तो क्या मैं कभी भी उसका मुंह देखना नहीं चाहता।मेरे आगे पीछे  मंडराती है तो लगता है कि जैसे कोई डायन मुझे अपने आगोश में लेना चाहती हो। मां सच कहता हूं ,अगर तुम्हारा ख्याल न होता तो मैं उसे ऐसा सुनाता कि कभी वो मेरे आस पास भी न दिखती।
अचानक मां ने किसी की सिसकी की आवाज सुनी ,शायद दरवाजे पर कोई था। वे दरवाजे के पास गईं तो देखा राधिका भागते हुए अपने घर में दाखिल हो रही थी।
वो स्तब्ध थी ,अपने बेटे की बात सुनकर।उनकी हिम्मत भी नहीं थी कि वे राधिका और उसकी मां का सामना कर सकें।

उस दिन से राधिका ,और उसकी मां ने श्रेयांश के घर आना जाना छोड़ दिया।
कुछ दिनों बाद श्रेयांश का ट्रांसफर मेरठ हो गया।वो लोग मेरठ चले गए।वहीं एक अमीर लड़की से श्रेयांश की  शादी भी हो गई।कार्ड आया था श्रेयांश की शादी का ,लेकिन राधिका के घर से कोई नहीं गया। 
और आज करीब 10 साल बाद इस तरह आमना सामना श्रेयांश का राधिका से।
राधिका ने उसे बता दिया की कहां उसकी केबिन है ,और शिवेंद्र जो पब्लिक रिलेशन अधिकारी थे उनसे काम समझाने को कह दिया।

श्रेयांश को ऑफिस आते नौकरी करते 6 महीने से ज्यादा वक्त हो गया था।

एक दिन राधिका की मां ने कहा ,राधिका पता है ,श्रेयांश और उसकी मां इसी शहर में हैं।राधिका रूखे स्वर में कहा , हां मुझे मालूम है।
तू उससे मिली ? मां ने फिर पूछा।
हां ,वो मेरे ही ऑफिस में है।
और फिर वो अपने कमरे में सोने चली गई।
फिर से श्रेयांश इतने सालों बाद आज इस कदर उसके दिलोदिमाग पर हावी होने लगा था ,बड़ी मुश्किल से उसने अपने जज्बात पर काबू पाया था ,ऑफिस में भी वो श्रेयांश से कम ही मिलती , श्रेयांश का  सारा प्रेजेंटेशन रिचा के माध्यम से देखती थी।आज मां ने फिर से इस तार को छेड़ दिया ।
उसका दिल टूटा था ,उसे जो चोट दी थी श्रेयांश की बातों ने वो घायल थी उसने सारा ध्यान अपनी पढ़ाई में झोंक दिया ।और अच्छे कॉलेज से एमबीए कर अपना बिजनेस खड़ा किया ,एक्सपोर्ट ,इंपोर्ट का।
आज सबकुछ था उसके पास ,उसने शादी नहीं की,जबकि बहुत रिश्ते आए।राधिका सांवली थी लेकिन नयन नक्श बहुत सुंदर थे।
पिछले तीन दिनों से राधिका की तबियत खराब थी ,ऑफिस नहीं गई ,मौसम बदलने का असर था ,वायरल हो आया था।
श्रेयांश की मां उसे देखने आई ,वो आश्चर्य चकित थी।उसने अपनी मां को प्रश्न वाचक दृष्टि से देखा।
मां ने कहा ,_हम दोनों सहेलियां हमेशा से एक दूसरे के संपर्क में थीं।तुम दोनो को लगता था कि हम एक दूसरे को भूल गए,संबंध और संपर्क हमारा कभी नहीं छूटा।
श्रेयांश ने चकाचौंध में आकर अपनी नौकरी में खूब घूस और अनाप शनाप पैसे की उगाही की ,आखिरकार शिकायत हुई और फिर जांच के बाद उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा।पत्नी भी फिजूलखर्ची और ऐशो आराम की आदी थी ,नौकरी से बर्खास्त होने के बाद उसने भी श्रेयांश का मुश्किल समय में साथ न दे कर झगड़ा कर तलाक ले लिया।
श्रेयांश पूरी तरह टूट गया था,मैने और श्रेयांश की मां ने खूब समझाया ,और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।उसने एमबीए किया,और टेक्सटाइल में डिप्लोमा किया।
सभी जगह उसने इंटरव्यू दिए लेकिन कहीं भी बुलावा नहीं आया।
आखिर एक दिन मैंने उसका रिज्यूम तुम्हारी ऑफिस में रिचा को दिया ,और चुपचाप चयन करवाने को कहा।
तुम उस समय दो दिन के लिए दिल्ली गई थी ।
राधिका हैरान थी।श्रेयांश की मां ने कहा ,राधिका आज मैं तुम्हारे सामने भीख मांगती हूं ,श्रेयांश को माफ कर दो,और हमारा घर संवार दो।
राधिका ने कहा _क्या आपका बेटा मुझे इस जनम में अपनाएगा?(एक व्यंग वाली मुस्कुराहट उसके चेहरे पर खेल रही थी)।
राधिका_,जब नेहा उसे छोड़कर गई ,तब वह बहुत रोता था ,और तुम्हें याद करता कहता शायद तुम्हारे दिल दुखाने का ये परिणाम है।
अगले दिन श्रेयांश की मां के साथ श्रेयांश भी आया , उस दिन उसने राधिका के सामने रोकर माफी मांगी ।
मुझे माफ कर दो राधिका ,मैंने तुम्हारा दिल दुखाया था ,उसकी सजा आज तक भोग रहा हूं।
क्या तुम सब कुछ भूल कर मुझसे शादी करोगी।
राधिका ने कहा _श्रेयांश मैने तुम्हें कब का माफ कर दिया था,तुमने मेरे रंग और मुझे बुरा भला न कहा होता तो आज मैं इस मुकाम पर न होती ।
तो क्या हम दोनों अब एक साथ भविष्य के सपने देख सकते हैं,और श्रेयांश घुटने के बल बैठकर राधिका से बोला क्या  तुम मुझसे शादी करोगी।
एक सुखद अंत के साथ ये कहानी खत्म होती है।
राधिका और श्रेयांश एक बेहतर जिंदगी की ओर एक अरसे बाद बढ़ ही गए।और दोनों सहेलियां एक रिश्ते में बंध गई।
समाप्त।