दो दिन बाद-आज पूरे दो दिनों बाद पूजा को होश आता है और जब वो आँखे खोलती है तो देखती है कि वो हॉस्पिटल में है और उसके माँबाप आसपास ही खड़े हैं।वो उसे होश में आया हुआ देखकर बहुत खुश होते हैं।साथ ही उसकी नजर अर्नव पर जाती है और उसे देखते ही उसे फिर से उसी सपने की याद आ जाती है।वो अब उठती है लेकिन अर्नव को कुछ नही बताती है।अब वो अर्नव से और अपने सभी दोस्तों से भी अच्छे से मिलती है लेकिन दिल से वो समझ चुकी है कि अर्नव की जान खतरे में है।दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे हैं और करींब भी आने लगे हैं।शैतान का  साया अर्नव के सिर पर मंडरा रहा है ये पूजा अच्छे से जानती है।

एक रात,अर्नव घर मे सो रहा है कि तभी तेज तूफान चल पड़ता है।भयंकर बारिश शुरू हो चुकी है।तभी अचानक लाइट भी चली जाती है कि तभी अर्नव भी चोंक कर उठ जाता है।अब उसे महसूस होता है कि जैसे कोई दरवाजा खटका रहा है।वो उठ कर जाता है और घर का मुख्य दरवाजा खोलता है लेकिन वहाँ कोइ नही होता।अब वो वापिस बन्द करके अपने कमरे में चला जाता है कि तभी फिर दरवाजा खटकता है,इस बार दरवाजा इतनी जोर से खटकता है कि पीहू और उसका पति राघव भी चोंक कर उठ  जाते हैं।वो सभी अपने-अपने कमरों से निकल कर मुख्य के पास आते हैं और जैसे ही अर्नव आगे आकर दरवाजा खोलने लगता है कि तभी पीहू आगे आती है और कहती है नही कोई दरवाजा नही खोलेगा।मुझे इस समय किसी का आना ठीक नही लग रहा है।

लेकिन तभी राघव कहता है तुम भी ना पीहू कितना डरने लगी हो ,क्या पता कोई मुसाफिर हो जिसे मदद की जरूरत हो।ये कहकर राघव दरवाजा खोलने के लिए आगे जाता है और दरवाजा खोलता है तो देखता है कि सामने एक लम्बा,चौड़ा सा लड़का खड़ा है और उसकी आँखें भी लाल रँग की है।रँग बिल्कुल गोरा है जिसकी वजह से उसकी आँखें  ओर भी अलग ही चमक रही है!अब वो अंदर  आने के लिए पूछता  है ये कहकर कि बारिश में भीगने की वजह से बहुत ठंड लग रही है तो क्या मैं अंदर आ सकता हूँ।इससे  पहले के पीहू कुछ कहती राघव उसे कहता है हां बेटा तुम अंदर आ सकते हो।

अब भी वो अंदर नही आता और फिर दुबारा पूछता है देखिए आपको कोई परेशानी तो नही होगी न,अगर मैं आऊँ?

राघव फिर से कहता है अरे इसमे परेशानी की क्या बात है तुम आ सकते हो अंदर।

जब तक अर्नव थोड़ा आगे आता है और उसे पहचान कर  कहता है अरे पापा ये तो अनीश है,मेरी ही क्लास में पढ़ता है।

तभी अनीश फिर से अब अर्नव से पूछता है हेलो अर्नव मुझे नही पता था कि ये तुम्हारा घर है ,तुम्हे कोई प्रॉब्लम ना हो तो क्या मैं अंदर आ जाऊँ।

अब अर्नव भी उससे कहता है यार इसमे प्रॉब्लम वाली कौनसी बात है,तुम अपना ही घर समझो और अंदर आ जाओ।जबतक चाहो मुझे अपना दोस्त समंझ कर रुक सकते हो।

अनीश अब शैतानी मुस्कुराहट के साथ घर के अंदर प्रवेश करने लगता है।वो अपना बायाँ पैर पहले अंदर रखता है,रात  के 12 बजे है,अमावस की घनघोर काली रात है।हर तरफ तूफान का शोर है और तेज बारिश जब जमीन पर पड़ रही है तो उसकी आवाज ओर भी ज्यादा भयंकर लग रही है।अब इतने भयंकर माहौल में अनीश घर मे बाएं पैर के साथ प्रवेश कर जाता है और सीधे जाकर पीहू के पैर छू लेता है।जैसे ही अनीश पीहू के पैर स्पर्श करता है तो उसे न चाहते हुए भी छाया के बेटे का स्पर्श याद आ जाता है और वो काँप कर पीछे हो जाती है।अब वो अनीश की लाल आँखे देखती है तो अंदर तक काँप जाती है लेकिन सबके सामने कुछ नही कह पाती है।

अनीश अब बताता है कि उसका कुछ देर पहले मकान मालिक से इस बात पर  झगड़ा हो गया कि मैं किराया समय पर नही दे पाया इसीलिए उसने मुझे इतनी रात में घर से निकाल दिया।मेरे पापा यहाँ से बहुत दूर रहते हैं और यहाँ मैं  सिर्फ पढ़ने के लिए ही आया हूँ।इसीलिए मैं किसी को भी नही जानता!ये सारी बातें सुनकर राघव को अनीश से बहुत हमदर्दी हो जाती है और वो अर्नव को कहते हैं कि जाओ अनीश को अपने साथ अपने ही कमरे में  ले जाओ।


लेकिन तभी पीहू चिल्लाकर बोलती है कोई नही रुकेगा मेरे अर्नव के साथ,इसको गेस्टरूम में रहने दो।

उसका इस तरह का रूखा बर्ताव देख कर राघव और अर्नव हैरान रह जाते हैं और अनीश मन ही मन मुस्कुराने लगता है।अब सभी अपने-अपने कमरों में चले जाते हैं लेकिन पीहू को अब हद से ज्यादा बेचैनी हो रही है।उसे नींद भी नही आ रही है और वो अपने कमरे में इधर से उधर चहलकदमी कर रही है।राघव भी उसकी ऐसी हालत देख रहा है और जब उससे रहा नही जाता तो वो पीहू से पूछ ही लेता है कि क्या हुआ पीहू इतनी क्यों बेचैन हो?


पीहू कहती है कि पता नही क्यों इस लड़के को देख कर मुझे छाया के बेटे की याद आ गई है।ऐसा लग रहा है मानो ये वही हो और हम सभी से बदला लेने आया हो।

अब राघव उसे समझाता है कि ऐसा कुछ नही है पीहू,अपने डर से अब बाहर निकल जाओ।भूल जाओ पुरानी बातों को।

पीहू बिल्कुल गम्भीर होकर खड़ी है और उसी के बारे में सोच रही है।