उल्फत के हसीन चेहरों ने,
नुमाईश को आफ़त में डाला...
बेपनाह इरादों को चूमके,
बेशक! इश्क की अल्फाजें ले डाला...

गहरे रंगों की अदाओं में,
रुप-सिंगार भी फ़ीका थी...
वो खूबसूरत हसीन नजारों में,
कहीं खोईं प्यार की झोंका थी...

ना कोई उम्र की सीमा है,
ना किसी से लाज़ की 'पर्दाफाश'...
बेचूक इशारों में,
संगीन दिवाना है...


     ✍️ विकास कुमार लाभ
              मधुबनी(बिहार)