रुक जाओ ज़रा ,थम जाओ ज़रा
तेरे सिवा दिल का माझी कौन बने.?
यूँ बर्बस्त नफरतों की चादर ओढ़ कर
छोड़ मत जाओ यूँ ..
मांगी है तुमसे तो बस एक मुलाक़ात
सताता है अकेलापन बहुत ...
बेसाख्ता सी राहों में कोई तो राज़दार हो,
जो समझ पाए शताब्दी सी दौड़ती धड़कनो की वज़हो को...
बस ख्वाईश ए आलम है इतना,
तेरी मेरी हो फिर से वही
एक मुलाक़ात
पतझड़ के मौसम में बहार से हो तुम..
यूँ मुँह मोड़ कर सावन में पतझड़ मत कर जाओ..
ये बूँदे जो बारिश की मदमस्त सी कर जाती है..
तुम नहीं तो ये भी अम्ल सा असर कर जाती है..
होते हो ज़ब साथ मेरे
ये जहान खूबसूरत हो जाता है,
बस ज़रा सी ख्वाहिश है मेरी
बस एक मुलाक़ात
वो चाँद है ना खूबसूरत सा... तुम संँग और खूबसूरत हो जाता है...
तुम नहीं तो बर्बस्त उसका दाग़ मुझे दिख ही जाता है..
हवाओ में जो खुशबू सी मैं तुम संग महसूस करती हूं..
तुम जो नहीं ये लू के थपेड़ो सी लगती है...
ये बगिया सुंदर सराबोर गुलाबों से,
काफ़ी है तुम संग बहक जाने के लिए..
ग़र जो तुम नहीं संग मेरे, काँटों सा अहसास हो जाता है...
ख्वाइशें हज़ार तुमसे तो कभी की ही नहीं...
मांगी है तो बस एक रूहानी मुलाक़ात
बस उम्र भर का साथ हो रंजिशो के सिवा....
ये जो दौर है अजब सा, कमजोर सा है मेरे लिए..
बस जरा एक ख्वाईश हाथ थाम कर यूँ ही उम्र गुज़ार दूँ.....एक मुलाक़ात में तुझ संग मैं कुछ यूँ खो जाऊँ
तू बन जाना समंदर सी गहरी मोहब्बत
मैं मोती बन तुझमें समा जाउंगी.....
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर उत्तराखंड

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