बिखर रहे परिवार आज घर छूटने से रोकें।
छोटी मोटी बातों से परिवार टूटने से रोकें।।
बसता है परिवार नवेला जब शादी होती है।
आई पीहर छोड़ नवेली जब शादी होती है।।
सपने बुनती नए-2 साजना के घर आती है।
नए माहौल नए घर में दुल्हन बन आती है।।
एक अपरिचित से दाम्पत्य बंधन में जीवन।
उसको संसार समझ सौंपा अपना जीवन।।
नई आदतें पड़े डालनी नई जगह की जैसे।
संस्कार रहा साथ में ससुराल में बहू जैसे।।
कुछ दिन तो सब ठीक चला पर धीरे धीरे।
बच्चे जन्में पालन में कलह हुई धीरे-धीरे।।
बीबी चाहे कुछ और पति चाहे कुछ और।
आपस में फिर शुरू हुआ झगड़े का दौर।।
एक दूसरे के मन में खुन्नस ने लिया जन्म।
पहला बच्चा छोटाहै दूसरा लेलिया जन्म।।
खान पान और लालन पालन में तकलीफ।
पति-पत्नी में रार मचे पोषण में तकलीफ।।
प्यार बदल गया झगड़े में मार पीट भी होए।
कैसे सहती बीबी आखिर कोने बैठ के रोये।।
एक समय ऐसा आए जब बर्दाश्त के बाहर।
झगड़े की बातें लगी निकलने घर के बाहर।।
दुःख नारी न सहती केवल नर भी सहता है।
दिल को लगी चोट तो दोनों कैसा सहता है।।
पति को छोड़ अकेले जीवन जीने को सोचे।
पत्नी पतिसे तंग हुई छुटकारा पाने को सोचे।।
तू बड़ी की मैं बड़ी में बात तलाक पर पहुँचे।
डायबोर्श की बात अदालत तक जाके पहुँचे।।
एक दूसरे से छुट्टी मिले यह अरमान है भारी।
अबोध बच्चों की किस्मत भी जाती है मारी।।
माँ-बाप के रोज-रोज तकरार का है नतीजा।
परिवार टूटता है केवल छूटे भाई व भतीजा।।
बच्चों की परवरिश करना नहीं है कोई खेल।
पति-पत्नी के सूझ बूझ से घर की चले रेल।।
आपस में हो प्यार ये सामाजिक बंधन न टूटे।
रोज-रोज हो तकरार तो वैवाहिक बंधन टूटे।।
किसी के हक में टूटना बिखरना ना है अच्छा।
इसमें बच्चों का जीवन कभी न होता अच्छा।।
अलग-अलग रहकर भी क्या याद नहीं आती।
साथ बिताए हरपल इस जीवन में नहीं जाती।।
अच्छा है दोनों अपना थोड़ा अभिमान घटाएं।
रहें प्यार से जीवन में कम में ही काम चलाएं।।
वैवाहिक संबंधों को जन्मों जन्मों तक खींचें।
प्रेम और विश्वास भरें दिल में रिश्तों को सींचे।।
शादी ब्याह न केवल एक धार्मिक बंधन होता।
परिवारों में अटूट एक सामाजिक बंधन होता।।
कोशिश रहे कि जीवन में कभी ये बंधन न टूटे।
ना पति-पत्नी और ना ही बच्चे एकदूजे से छूटे।।
डायबोर्स तलाक न हो ना कोई परिवार ही टूटे।
ईश्वर ने दिया है जो भी उसमें ही आनंद ये लूटे।।
रचियता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़,यू.पी.

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