पता नहीं मुझे भी क्यों मैं ऐसा करता हूँ
जानता हूँ दीवानी है तू भी मेरे मोहब्बत का
फिर नाजाने क्यों इस बात से मैं इनकार कर देता हूँ
मेरे ज़िन्दगी के तकलीफ से तुम्हे जो दर्द होता है
कसम से मुझसे भी तेरे दर्द से दिल बहुत दुखता है
जानता हूँ मान चुकी है तू भी ज़िन्दगी मुझे
फिर नाजाने क्यों इस बात से मैं इनकार कर देता हूँ
समझ नहीं आता सनम मेरी की ऐसा क्यों करता हूँ
ये तो तुम भी जानती हो मैं तुम पे कितना मरता हूँ
अहसास है मुझे की हर सांस में तेरे बसता हूँ मैं ही
फिर नाजाने क्यों इस बात से मैं इनकार कर देता हूँ
तीर जैसे चुभता है वो आँसू जो तेरे पलकों से छलकता है
देख कर तुम्हे इस तरह मेरा दिल बहुत तड़पता है
मैं भी चाहता हूँ तुमसे बेशुमार पर कह नहीं पाता की
फिर नाजाने क्यों इस बात से मैं इनकार कर देता हूँ
नहीं आता मुझे प्यार जताना या कोई राज़ है
जो तेरे गली तक आते आते खुद पे खुद रुक जाता हूँ
दिल बखूबी जानता है की हर पल रहता है तुम्हे इंतज़ार मेरा
फिर नाजाने क्यों इस बात से मैं हर बार इनकार कर देता हूँ
जो भी है उझलन तेरे ज़िन्दगी में मैं सुलझाना चाहता हूँ
इस ज़ालिम के सामने सनम तुम्हे अपनाना चाहता हूँ
जो किसी गैर का तुम्हे देखना भी गवारा नहीं तेरे प्रीतम के लिए
तुम तो जानती हो ना सनम की मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ.....!!,,स्वरचित,,,💔💔💔💐💐💐💘💘💘🏵️🏵️💞प्रीतम वर्मा✍️✍️✍️✍️

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