उम्मीदों के चिराग सदा 
यू ही जलाएं रखना
अमावस्या की काली रात ही 
दीपो से रौशन हुआ करती हैं

ना होना उदास सदा
 यू ही मुस्कराते रहना 
गमों के बादलों से खुशियां की    
 बरसात हुआ करती हैं

आते हैं जीवन में कितने 
ऐसे मोड़ 
जहां आकर हर गली बन्द
नजर आया करती हैं 

जब कोई राह नजर
 नहीं आएं 
 कहीं से आशा की रोशनी 
दिख जाया करती हैं 

ना होना हताश घबराकर 
कंटीली राहों से 
उन राहों पर चलकर ही तो 
मंजिले मिला करती हैं 

बना लेना पैरो के छालों 
को हौसला अपना 
कभी कभी दर्द ही तो 
दवा बन जाया करती हैं 

माना कठिन हैं चलना बहुत
सत्य मार्ग पर
झूठ की राहें बड़ी लुभावनी 
हुआ करती हैं

मत भागों चकाचौंध के 
पीछे इतना 
अंधेरी रातों के बीत जाने पर 
 सुबह हुआ करती हैं 
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश