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जन्म से जुड़े होते है हम मईया बाबुल से
बचपन से खिलते है फूल बनके आँगन के
जीवन की डोर से बंधे भाई बहनो के साथ होते है 
फिर क्यों हमें बाबुल के प्यार भरे दहलीज छोड़ जाना होता है  

माँ की लाडली गुड़िया बाबुल के जो शान होती है
एक बेटी अपने घर परिवार की जो मान होती है
जो पली बड़ी होती है नाज़ो से अपनों की संसार में
फिर क्यों हमें बाबुल के दुलार भरे दहलीज छोड़ जाना होता है

बचपन से आजतक चिडियो सी चहकते आए है
पैरो में सुहानी पायल इस आँगन में छनकाते आए है
जहाँ मिला हमें खुला आसमान पँख लगाकर उड़ने की
फिर क्यों हमें बाबुल की विश्वास भरे दहलीज छोड़ जाना होता है

जैसे जैसे ढलती है ज़िन्दगी हम उसी में रंग जाते है
माँ के आँचल के सिवा हमे कहाँ प्यार भरी सुकून पाते है
जो घुली है ज़िन्दगी जिस घर के हर कोने कोने से
फिर क्यों हमें वो बाबुल की घर के दहलीज से बिदा होना होता है

कैसी है ये खेल किस्मत की ये किसने रीत बनायीं है
जिसने भी बनायी ये रीत क्या उसको ज़रा भी दया नही आयी 
हँसती खिलखिलाती चिड़िया को रस्मो की बंधन में बाँध दिया 
क्यों हमें बाबुल की रानी बिटिया से किसी घर के बहू बना दिया जाता है

कैसा दर्द व तड़प महसूस होता है माँ बाबुल के दिल में 
ये उसी को महसूस होगा जिसने अपनी बेटी को बिदा की है
क्या गुज़रती है उस बेटी के दिल पे जो पल में परायी कर जाती
जाने किस लिए ईश्वर ने बेटी के ज़िन्दगी में ऐसी जुदाई लिख दिया है

नहीं रह जाती उस आँगन में कोई नूर खुशियों की
नाही घर आँगन में कोई पायल का झंकार सुनाई पढ़ती है
ज़ब सुना है बेटी के बिन दुनिया मईया बाबुल के ज़िन्दगी में
फिर क्यों नैना को बाबुल के दुलार भरे दहलीज छोड़ जाना होता है
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नैना.... ✍️✍️