स्वामी केशवदास जी और बाकी सभी भी उसी दिशा में जा रहे हैं जिधर वो सभी है।कुछ ही देर में वो सभी वहाँ पहुँच जाते हैं और देखते हैं कि अनीश वहाँ पर मरा हुआ पड़ा है और उसके सामने अर्नव एक त्रिशूल लिए खड़ा है,जिस पर अनीश का रक्त भी लगा हुआ है।
पीहू इस नजारे को देखती है तो खुश हो जाती है और दौड़कर उसे अपने गले लगा लेती है और कहती है शुक्र है मेरा बच्चा बिल्कुल ठीक है।
बाकी सभी भी इस नजारे को देखकर बहुत प्रसन्न हो जाते हैं।अब अर्नव आगे आता है और स्वामीजी को प्रणाम करता है और सभी खुशी-खुशी घर आ जाते हैं।
केशवदास जी को कोई फ़ोन आ जाता है और वो बाहर से ही वापिस अपने आश्रम चले जाते हैं।
राघव घर आकर अर्नव से पूछता है कि उसने इतने शक्तिशाली शैतान को मारा कैसे है?
अर्नव बताता है कि वो तो मुझे जान से मारकर मेरा खून पीने ही वाला था लेकिन तभी मेरी नजर वहां से कुछ दूर रखे हुए त्रिशूल पर चली गई,तो मैं दौड़कर वहाँ गया और उसे उठा कर अनीश के सीने में मार दिया।
अब सभी को सारी बात जानकर तसल्ली होती है और पीहू अब पूजा को कहती है जाओ बेटा थोड़ी देर अर्नव के साथ उसके रूम में जाकर बातें करलो,फिर वही तुम्हे छोड़ आएगा।जब तक उसे भी अच्छा लगेगा तुम्हारे साथ बैठ कर।
अब पूजा भी अर्नव के साथ उसके कमरे में चली जाती है और उसके साथ बैठ जाती है।वो अर्नव से पूछती है “तुम ठीक हो न अर्नव”?
अर्नव उसका हाथ पकड़ कर कहता है हाँ पूजा मैं बिल्कुल ठीक हूँ,बस तुम मेरे साथ रहना हमेशा।ये कहते हुए वो पूजा के गले लग जाता है और पूजा भी उसके गले लग जाती है।
अब कुछ देर बातें करके दोनो नीचे आते हैं और पूजा अपने घर जाने लगती है कि तभी पीहू उसे रोकते हुए कहती है रुको बेटा सुबह के 4बजे हैं इतनी सुबह अकेले जाना ठीक नही है।अब वो अर्नव को कहती है कि जाओ अर्नव पूजा को उसके घर तक छोड़ कर आओ और इसके माँबाप से भी मिलकर ही आना ताकि उन्हें तसल्ली हो जाए।
अर्नव कहता है ठीक है माँ,मैं जाता हूँ।
पूजा और अर्नव दोनो गाड़ी में जा रहे हैं और साथ ही एक-दूसरे से बातें भी कर रहे हैं।दोनो ही एक दूसरे में खोए हुए हैं और एक दूसरे से बातें करते हुए वो पूजा के घर पहुँच जाते हैं।वहां वो पूजा के घरवालों से मिलकर सारी बात बता देता है जिससे खुश होकर उसके घरवाले कहते हैं कि अब जल्द ही तुम दोनों के रिश्ते की बात करनी चाहिए।शादी की तो अभी उम्र नही है तुम दोनों की लेकिन खतरे को देखते हुए हमें जल्द ही शादी की बात भी कर ही लेनी चाहिए।
अब पूजा के पापा अर्नव से कहते हैं कि कल ही हम तुम्हारे घर तुम्हारे माँबाप से मिलने आ रहे हैं और फिर रिश्ते की भी बात कर लेंगे।
ये सुनकर पूजा की खुशी का ठिकाना नही रहता और वो शरमा कर अपने कमरे में चली जाती है।अर्नव भी अब उन सबसे मिलकर उनके पैर छूता है और आशीर्वाद लेकर वापिस आता है।
रास्ते मे मुस्कुराता हुआ अर्नव जँगल की ओर जा रहा है और फिर सड़क के ठीक बीच मे गाड़ी रोक लेता है।वहाँ वो गाड़ी से उतर कर बाहर आता है और बीचों बीच खड़ा हो जाता है।तेज हवा चल रही है और उसका रूप बदल रहा है!अब वो शैतानी हँसी हँसता हुआ कहता है मैं अर्नव नही चुड़ैल का बच्चा अनीश हूँ...... .....
वो अब हँसते हुए खुद से ही बातें कर रहा है और कहता है अब उस अर्नव की हर चीज मेरी होगी,उसकी पूजा भी मेरी होगी।उसकी माँ भी मेरी होगी यहाँ तक कि उसका घर भी मेरा ही होगा।मैं छाया का बेटा अब पूजा से शादी कर लूँगा और हर जगह मैं ही राज करूँगा।ये कहकर वो जोर-जोर से हँसने लगता है ,जिससे वहां का माहौल ओर भी ज्यादा भयानक हो जाता है!अनीश इस समय बहुत भयानक हो चुका है।हर तरफ दिन में भी अँधेरा फैल गया है।चुड़ैल का बच्चा निकल पड़ा है एक तबाही की ओर----

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