ब्रह्माजी ने जब इस प्रकृति का निर्माण किया।
स्वयं को उन्होंने पहले दो भागों में बांट लिया।

दांये हाथ पुरुष रूप बाएं हाथ प्रकृति रूप है।
दुर्गा राधा  लक्ष्मी सरस्वती  सावित्री 5रूप है।

प्रकृति रूप स्वयं को बांटा यह छठवां रूप है।
प्रकृति देवी का ही षष्ठम अंश ये षष्ठी रूप है।

यही षष्ठी माता हैं जिनकी होती है छठ पूजा।
नवरात्र में षष्ठीमाँ कात्यायनी की होती पूजा।

शिशु के जन्म होनेपे छठवें दिन छट्ठी है होती।
भादौं मास में भी भादौ छठ को छट्ठी है होती।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में  षष्ठी देवी का वर्णन मिले।
छट्ठी  मइया के महात्म्य का सुंदर वर्णन मिले।

छठ पूजन आस्था परम पवित्रता का महापर्व।
सनातन हिन्दूधर्म संस्कृति का यह पावन पर्व।

ब्रह्मा जी की ये मानस पुत्री हैं यह छट्ठी माता।
भगवान सूर्य नारायण की बहन हैं षष्ठी माता।

इस पर्व में सूर्य देव को अर्ध्य दे करें उपासना।
प्रकृति की आराधना करते सूर्य की उपासना।

महापर्व ये छट्ठी का है  आस्था का उल्लास है।
दीपकों के पंचपर्व दिवाली बाद हर्षोल्लास है।

श्रीराम ने राम राज्य स्थापित करने को पूजा।
इस कामना से षष्ठी मैया की वेभी किए पूजा।

अंतःकरण की शुद्धि एवं परिवार की समृद्धि।
इस छठ पूजा में मन्नत स्वास्थ्य आयु में वृद्धि।

सूर्यदेव उषा जल वायु की व्रती करते प्रार्थना।
छठ मैया की कृपा से सुख शांति की कामना।

छठ में धूम धाम लोक आस्था का पर्व महान।
छठमैया के गीत गायें पूजा करते सुबह शाम।

नहाय खाय खरना एवं सुबह शाम का अर्ध्य।
छट्ठी माँ की पूजा करें दो बेला सूर्य को अर्ध्य।

सनातन काल से ही सूर्य को प्रातः देते अर्ध्य।
प्रथम पर्व है इसमें डूबते सूर्य को भी दें अर्ध्य।

पुराणों में छट्ठी मइया का नाम है कात्यायनी।
ऋग्वेद में भी वर्णन है षष्ठी माँ व कात्यायनी।

छठ मइया की कृपा सुख शांति की कामना।
करें मनोरथ सब पूर्ण सूर्य-षष्ठी शुभकामना।

सूर्य को अर्ध्य देकर ये छठव्रती करें समापन।
चार दिनों के महापर्व का होगा अब समापन।

षष्ठी पूजा के बने चढ़े प्रसाद दौरे लेकर चले।
खुश हैं सभी व्रती छठमैया को पूजे घर चले।

घर जायेंगें प्रसाद ले अपने पारण करेंगें वीर। 
टेकुआ पुआ पूड़ी फल गुड़ दूध चावल खीर।


रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.