ना कोई ख्वाहिश था मेरे सुनी ज़िन्दगी में
मेरे दिल में ना कोई दिलकश अहसास था
ज़ब तक तुम न मिली थीं मुझसे ओ सनम मेरे 
ये ज़िन्दगी मेरी बेमतलब सा जैसे कट रहा था 

फिरता था जहाँ में अनजान कुछ हसरते लिए
मुझे शायद तुम जैसी सनम की तलाश थे हमेशा से हज
जिसे देखे बिना अब दिल लगता ही नहीं एक पल के लिए 
जाने कैसे अब तक ओ सनम तेरे बिन मैं जी रहा था

अक्सर मैं कुछ खोया खोया रहने लगा था
ज़िन्दगी के राहो में यूँ तन्हा होने लगा था
मिले जो हम एक दूजे से अनजानी राहो में
लगा जैसे वही मंज़िल हो तुम मुझे जिसका इंतज़ार था

अब मुस्कुराता हूँ खुलकर दिल में कोई गम नहीं है
तेरे होठों की हँसी देख ही मेरी ज़िन्दगी सांस लेती है
अब महसूस हुआ मेरे दिल को की कमी क्या थीं जीने में
अब साफ दिखने लगा चेहरा जो मेरे ख़्वाबों में धुंधला सा था

देखा है जबसे सनम तुम अपनी नशीली पलकें उठाकर
हम होगए बस तुम्हारे दिल से खुद की जहाँ भुला कर 
मिला जो सुकून सनम तुम्हारे मोहब्बत की अहसास में
यकीं हुआ दिल को तुम वही चाहत हो जिसकी हमें तलाश था

अब छोड़ दिया है दिल उड़ना बागो में भवरे की तरह
अब किसीका इंतज़ार न रही तुमने चाहा है मुझे इस तरह
क्या होता है सच्चा अहसास प्यार की इस ज़िन्दगी में
तुमने ही अहसास दिलाया जो कब से दिल अनजान था

कहाँ मिलता है जहाँ में सबको आसानी से मोहब्बत
करते है हर सांस पे जो महबूब के लिए खुदा से इबादत
पर कुछ तो साथ दिया खुदा भी हमें यूँ मिलाने में
तभी तो आसान हुआ राहें हमारे जो लगता बहुत मुश्किल था

यूँ ना रोको ए दिलबर मेरी हाले दिल बताने के लिए
अब प्रीतम के ज़िन्दगी साँसे लेने लगी अपनी मधु के लिए
रोशन हुआ दुनिया ज़ब से तेरी कदम पढ़ा मेरे दिल के दहलीज पे
मुक़म्मल हुआ हर दुआ जो कब से मुझसे खफा खफा सा था....!!
स्वरचित,,,🏵️🏵️🏵️🏵️
प्रितम वर्मा✍️✍️✍️✍️✍️🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄