घर की शोभा आँगन से है
घर की सारी खुशियाँ आँगन से है
वो आँगन जहाँ हम सबसे पहला कदम चलें
वो आँगन जहाँ खुशियों के दीप जले
वो आँगन जहाँ हम पले बढ़े
वो आँगन जहाँ हमने संस्कार के पाठ पढ़े
वो आँगन जहाँ हमको प्यार मिला
वो आँगन जहाँ मेरे जैसा रख फूल खिला
वो आँगन जहाँ तुलसी की होती पूजा
वो आँगन जहाँ से ना जाए कोई भूखा
वो आँगन जहाँ अतिथि जैसे थे भगवन
वो आँगन जहाँ होता था भजन कीर्तन
अब ना घर मे आँगन है
ना पहले जैसा अपनापन है
धन्यवाद
सत्येंद्र पाण्डेय 'शिल्प'
गोंडा उत्तरप्रदेश

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