मुझे याद आई आज बचपन की रातें,
दादी की लोरी नानी के किस्से,
रातों में सुनते थे गोदी में छुप के,
नानी सुनाती थी जब भी कहानी,
कहानी में होती थी परियों की रानी,
जादू के घोड़े पर एक आता था राजा,
परियों की रानी जब राजा से मिलती,
दोनों की बनती थी प्रेम कहानी,
तभी एक थी जादूगरनी भी आती,
राजा से कहती करो मुझसे शादी,
नहीं तो करूंगी जादू से वश में,
पर राजा न माने जादूगरनी की बातें,
तब जादूगरनी ने अपना जादू चलाया,
राजा को उसने किया अपने वश में,
तब परियों की रानी ने चक्कर चलाया,
जादूगरनी का जादू उसी पर चलाया,,
जादूगरनी मरी राजा परी के पास आया,
ऐसी कहानी अब होती कहां है,
नानी और दादी के किस्से अब ख्वाबों में होते,
अब बच्चों की रातें मोबाइल पर बीतें,
न पहले सी बातें न पहले सी रातें,
अब बच्चे न सुनते रातों को किस्से,
नानी के किस्से हुए अब पुराने,
दादी की लोरी अब सुनता कौन है?
बचपन की यादें बहुत हैं सताती,
कोई फिर से ला दे वो बीता हुआ कल,
नानी के किस्से में परियों की रानी।।
डॉ कंचन शुक्ला
स्वरचित मौलिक

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