ये जो परदेस तुम चले गए हो
बूढ़ी अंखियन की आस ले गए हो,
कोई सहारा नहीं है जीवन का
होंठो की मुस्कान ले गए हो
कैसे जियेंगे तुम बिन वृद्ध अवस्था में
तुम ही तो थे सहारा जीवन का,
ये जो परदेस तुम चले गए हो
बूढ़ी बातों को अनसुना कर गए हो,
समय है जिनका पोते पोती संग खेलने के
उनके जीवन में सूनापन दे गए हो,
तकते है राह तुम्हारी ओ परदेस में बसने वाले
बूढ़ी आँखों में बेइंतहा इंतजार दे गए हो
सहारा बने जो बचपन में
चलना तुम्हें सिखाया था
उसी सहारे को बेसहारा कर गए हो
ये जो परदेस तुम चले गए हो
बूढ़ी अंखियन की आस ले गए हो,
खुद भूखे रहकर माँ ने तुम्हें निवाला खिलाया था
आज उसी माँ को तड़पता बिलखता छोड़ गए हो
जिसके कांधे चढ़कर तुमने देखे होंगे मेले
आज उसी पिता को अपने कांधे से वंचित कर गए हो,
ये जो परदेस तुम चले गए हो
बूढ़ी अंखियन की आस ले गए हो,
ये जो परदेस तुम चले गए हो
जीवन की अंतिम आस ले गए हो,
निकेता पाहुजा ✍️

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