आज मेरी आयु 41 साल की है,2019 को मेरे माता पिता मुझे लेकर अमेरिका चले गए थे, उस समय मेरी आयु करीब 10 वर्ष की थी।
इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मैंने देखा बहुत बड़ा ऑक्सीजन का बड़ा प्लांट लगा हुआ था।,और पूरे एयरपोर्ट में एयर प्यूरीफायर लगा था ,एयरपोर्ट से बाहर निकलने पर लोग ऑक्सीजन सिलेंडर पीठ पर बस्ते की तरह टांगे नजर आ रहे थे।
2018 में मेरे छोटे भाई की मौत एलर्जिक ब्रोंकाइटिस ,और दिल की धमनियों में रक्त नही जाने की समस्या से हुई थी।इसी कारण मेरे माता पिता ने दिल्ली छोड़ दिया था।
दिल्ली में जाड़े के वक्त उस समय भी धुंध छाई होती थी ।
_इसका बड़ा कारण हरियाणा ,और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसल कटने पर किसान पराली जलाते थे।
_इंडस्ट्रियल कचरा यमुना में बड़ी मात्रा में बहा दिया जाता था। जिससे यमुना के जल में झाग उठता रहता ,और ये पीने में भी जहरीली हो गई थी।
जीवाश्म वाले ईंधन के उपयोग से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड ,और सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा अत्यधिक बढ़ने से सांस लेना मुश्किल हो रहा था।
सुना था
2021 में यूनाइटेड नेशंस ने क्लाइमेट चेंज पर अपनी चिंता जताई और सभी देशों को इसका समाधान सुझाया।पेड़ अधिकाधिक लगाए जाएं।
अमेरिका और विकसित देश तो संभल गए थे लेकिन भारत ने सबक नहीं लिया ।जिसका परिणाम ये है कि ऐतिहासिक गुलाबी शहर जयपुर रेत के टीले में तब्दील हो चुका था।चेन्नई ,और कोलकाता जैसे शहर भारी बारिश से जूझते अनेकानेक बीमारियों के चपेट में थे ।
मुंबई का भी हाल बुरा था ,लगातार ज्वार भाटे आने से शहर परेशानी से जुझ रहा था।
अगर हम अभी नहीं चेते तो भविष्य में भारत की तस्वीर कुछ इस प्रकार होगी।
ज्यादा से ज्यादा सौर ऊर्जा ,और बैटरी जनित वाहनों का प्रयोग करना होगा।और सबसे ज्यादा प्रदूषण ,कपड़े उद्योग से होता है,एक कपड़े के बनने में काफी पानी खर्च होता है,इसलिए कपड़े को रिसाइकल करना सही होता है।
मुझे दिल्ली में कुछ काम था ,उसे निपटाया और फिर निकल गई अमेरिका।

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