जिंदगी जीने के लिए रोज मौत से खेल लेते हैं,
हां,दुनिया वालों हम तुम्हारी बेअदबी रोज झेल लेते हैं।
पैसा प्यार को निगल जाता है यह सुना तो था अक्सर,
सिक्के की तरह लोग जज्बातों को उछाल देते हैं।
अचानक लगता जिंदगी हाथ से फिसल जाएगी,
और अचानक ही हम इसे मुट्ठी में समेट लेते हैं।
पतंग की डोर नहीं रिश्ते कि जिसने चाहा लूट लिया,
पर हवाओं के संग क्यों लोग एहसास बदल लेते हैं।
ना जज्बात, ना ताल्लुकात, ना धड़कने रही अब 'सीमा' साजिशों के चूल्हे पर लोग रोटियां भी सेंक लेते हैं।
स्वरचित सीमा कौशल यमुनानगर हरियाणा

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